Telegram Ban India : टेलीग्राम पर आतंकी गतिविधियों के आरोप, हाई कोर्ट में केंद्र ने दी सख्त दलील

Telegram Ban India : मैसेजिंग ऐप टेलीग्राम एक बार फिर विवादों के केंद्र में है। NEET परीक्षा से पहले पेपर लीक की आशंका और उसके बाद भारत में अस्थायी बैन जैसे कदमों के बीच अब सरकार ने हाई कोर्ट में इस प्लेटफॉर्म को लेकर गंभीर आरोप लगाए हैं। केंद्र सरकार का कहना है कि टेलीग्राम का इस्तेमाल केवल संवाद तक सीमित नहीं है, बल्कि इसे आतंकी गतिविधियों और अवैध कामों के लिए भी इस्तेमाल किया जा रहा है।

यह मामला ऐसे समय में सामने आया है जब टेलीग्राम ने भारत में लगाए गए प्रतिबंध को अदालत में चुनौती दी है। ऐप की ओर से दलील दी गई है कि उसके खिलाफ लिया गया कदम उचित नहीं है, जबकि सरकार का रुख इससे बिल्कुल अलग है।

NEET पेपर लीक विवाद के बाद बढ़ी सख्ती

Telegram Ban India : हाल ही में NEET परीक्षा से पहले पेपर लीक और डेटा लीक की आशंका को देखते हुए टेलीग्राम पर सख्त कार्रवाई की गई थी। परीक्षा से जुड़ी संवेदनशील जानकारी के कथित दुरुपयोग ने जांच एजेंसियों और सरकार दोनों की चिंता बढ़ा दी थी। इसी पृष्ठभूमि में टेलीग्राम पर अस्थायी रोक लगाने का फैसला लिया गया।

सरकारी पक्ष का कहना है कि यह प्लेटफॉर्म कई बार ऐसे नेटवर्क का हिस्सा बन जाता है, जहां अवैध सामग्री, संदिग्ध समूह और गोपनीय सूचनाओं का आदान-प्रदान होता है। इसलिए केवल एक तकनीकी मंच मानकर इसे नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।

Telegram Ban India
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Telegram Ban India : हाई कोर्ट में क्या कहा गया

Telegram Ban India : हाई कोर्ट में सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार ने तर्क दिया कि टेलीग्राम पर निगरानी और नियंत्रण की कमी इसे खतरनाक बनाती है। सरकार के अनुसार, यह ऐप ऐसे चैनलों और ग्रुप्स को पनाह देता है, जिनका इस्तेमाल संदिग्ध गतिविधियों के लिए किया जाता है।

दलील में यह भी कहा गया कि जब किसी डिजिटल प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल परीक्षा में धांधली, अवैध लेनदेन या सुरक्षा को खतरे में डालने वाले कामों के लिए होने लगे, तो उस पर कार्रवाई जरूरी हो जाती है। सरकार ने यह स्पष्ट किया कि राष्ट्रीय सुरक्षा और सार्वजनिक हित सर्वोपरि हैं।

टेलीग्राम पर क्यों उठ रहे सवाल

Telegram Ban India : टेलीग्राम की लोकप्रियता उसकी तेज स्पीड, बड़े ग्रुप्स और चैनल फीचर के कारण है। लेकिन यही खूबियां कई बार इसके दुरुपयोग की वजह भी बनती हैं। प्लेटफॉर्म पर कंटेंट मॉडरेशन की सीमित व्यवस्था को लेकर लंबे समय से सवाल उठते रहे हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि एन्क्रिप्शन और प्राइवेसी फीचर्स जहां यूजर्स की सुरक्षा के लिए जरूरी हैं, वहीं इन्हीं सुविधाओं का फायदा उठाकर कुछ लोग गैरकानूनी गतिविधियां भी संचालित कर सकते हैं। इसी वजह से टेलीग्राम जैसे ऐप्स पर रेगुलेशन की मांग लगातार बढ़ रही है।

कानूनी और तकनीकी बहस दोनों तेज

इस पूरे मामले ने एक बार फिर डिजिटल प्लेटफॉर्म्स की जवाबदेही पर बहस तेज कर दी है। एक ओर यूजर्स की प्राइवेसी और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का सवाल है, तो दूसरी ओर राष्ट्रीय सुरक्षा, परीक्षा की निष्पक्षता और साइबर अपराध की चुनौती है।

केंद्र सरकार का रुख यह संकेत देता है कि आने वाले समय में ऐसे प्लेटफॉर्म्स पर निगरानी और सख्त हो सकती है। यदि अदालत सरकार के तर्कों को स्वीकार करती है, तो यह डिजिटल रेगुलेशन की दिशा में एक अहम उदाहरण बन सकता है।

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Telegram Ban India : अब निगाहें हाई कोर्ट के अगले फैसले पर टिकी हैं। टेलीग्राम की चुनौती और सरकार की सख्त दलीलों के बीच अदालत को यह तय करना है कि अस्थायी बैन और उससे जुड़ी कार्रवाई कितनी उचित थी।

फिलहाल यह मामला सिर्फ एक ऐप तक सीमित नहीं रह गया है। यह सवाल भी खड़ा कर रहा है कि क्या भारत में डिजिटल प्लेटफॉर्म्स को लेकर नियमों को और कड़ा करने की जरूरत है, ताकि परीक्षा प्रणाली, सार्वजनिक सुरक्षा और कानून-व्यवस्था को किसी भी तरह के खतरे से बचाया जा सके।

 

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