Prashant Kishor Expenditure को लेकर बिहार की राजनीति में तूफान मच गया है। जन सुराज पार्टी के संस्थापक प्रशांत किशोर के चुनावी खर्च पर भाजपा ने सीधे निर्वाचन आयोग (ECI) का दरवाजा खटखटाया है। 21 जुलाई 2026 को भाजपा प्रतिनिधिमंडल ने ECI को ज्ञापन सौंपकर आरोप लगाया कि प्रशांत किशोर बैंकिपुर विधानसभा उपचुनाव में निर्धारित खर्च सीमा का भारी उल्लंघन कर रहे हैं।
Prashant Kishor Expenditure पर क्या हैं आरोप?
भाजपा ने दावा किया है कि प्रशांत किशोर एक्सपेंडिचर ₹40 लाख की निर्धारित सीमा से कई गुना ज्यादा है। पार्टी का कहना है कि प्रशांत किशोर ने करोड़ों रुपये खर्च किए हैं। ये खर्च मुख्य रूप से शेल कंपनियों के जरिए किए जा रहे हैं।
भाजपा ने ECI को दी गई शिकायत में दो कंपनियों — Simple Sense Analytics Pvt. Ltd. और News Lighthouse LLP — का जिक्र किया है। इन कंपनियों के माध्यम से सोशल मीडिया पर भारी-भरकम प्रचार अभियान चलाया जा रहा है।

मुख्य आरोप:
- फर्जी सोशल मीडिया अकाउंट्स और बॉट नेटवर्क का इस्तेमाल
- विदेश से संचालित अकाउंट्स के जरिए मतदाताओं को प्रभावित करना
- इन्फ्लुएंसर्स को पैसे देकर आर्टिफिशियल पब्लिक सेंटिमेंट बनाना
- मॉडल कोड ऑफ कंडक्ट (MCC) और जन प्रतिनिधित्व अधिनियम का उल्लंघन
भाजपा नेता श्याम नारायण सिंह ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि लोकतंत्र में चुनाव लड़ने का अधिकार सबको है, लेकिन नियमों का पालन करना भी जरूरी है।
बांकीपुर उपचुनाव की सियासी पृष्ठभूमि
बांकीपुर सीट पर 30 जुलाई को मतदान होना है। इस उपचुनाव में मुख्य मुकाबला प्रशांत किशोर (जन सुराज), नीरज कुमार सिन्हा (भाजपा) और रेखा कुमारी (RJD) के बीच है।
जन सुराज पार्टी के बिहार अध्यक्ष मनोज भारती ने भाजपा के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि यह भाजपा की बेचैनी का सबूत है। उन्होंने चुनौती देते हुए कहा कि भाजपा पहले अपना फंडिंग खुलासा करे।
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क्या कहते हैं विशेषज्ञ?
Prashant Kishor Expenditure का मुद्दा सिर्फ बांकीपुर तक सीमित नहीं है। यह बिहार की आगामी विधानसभा चुनावों के लिए भी महत्वपूर्ण संकेत दे रहा है। अगर निर्वाचन आयोग इन आरोपों की गंभीर जांच करता है तो बड़े खुलासे हो सकते हैं।
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Prashant Kishor Expenditure पर उठे सवाल बिहार राजनीति को नई दिशा दे रहे हैं। अब सबकी नजर 30 जुलाई के मतदान और निर्वाचन आयोग के फैसले पर है। क्या ECI इस मामले में सख्त कार्रवाई करेगी? या ये आरोप सिर्फ सियासी आरोप-प्रत्यारोप का हिस्सा साबित होंगे?
