Oil Prices Jump : ग्लोबल बाजार में तेल की कीमतों में उछाल देखा गया है। अमेरिकी नौसेना द्वारा ईरानी कार्गो जहाज ‘तौस्का’ (Touska) को जब्त करने की घटना ने मध्य पूर्व में तनाव बढ़ा दिया है, जिससे शांति वार्ता पर असर पड़ा है।
Oil Prices Jump : US-Iran तनाव से तेल कीमतों में उछाल
इस सप्ताहांत काफी अशांत रहा। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बताया कि यूएस नेवी के गाइडेड मिसाइल डिस्ट्रॉयर यूएसएस स्प्रुएंस (USS Spruance) ने ओमान की खाड़ी में ईरानी जहाज को रोकने की कोशिश की। जहाज चेतावनियों की अनदेखी कर ब्लॉकेड तोड़ने की कोशिश कर रहा था। अमेरिकी बलों ने जहाज के इंजन रूम में गोलीबारी की और फिर मरीन्स ने जहाज पर कब्जा कर लिया।
ईरान ने इस कार्रवाई को “सशस्त्र समुद्री डकैती” बताया और बदला लेने की धमकी दी। इसके साथ ही ईरान ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज (Strait of Hormuz) पर फिर से सख्त नियंत्रण लगा दिया, जो दुनिया के लगभग 20% तेल व्यापार का महत्वपूर्ण मार्ग है। कुछ घंटे पहले ही ईरान ने इस जलडमरूमध्य को खोलने की घोषणा की थी, लेकिन अब स्थिति फिर से तनावपूर्ण हो गई है।

तेल की कीमतों पर असर
इस घटना के बाद Oil Prices Jump साफ दिखाई दिया:
- Brent Crude में 7.9% तक की बढ़ोतरी हुई, जो $97.50 प्रति बैरल तक पहुंच गया। बाद में यह $95-96 प्रति बैरल के आसपास कारोबार कर रहा है।
- WTI क्रूड भी 6% से ज्यादा उछलकर $89-90 प्रति बैरल के करीब पहुंच गया।
- यूरोपीय प्राकृतिक गैस की कीमतों में भी 11% तक का उछाल दर्ज किया गया।
पिछले शुक्रवार को जब होर्मुज स्ट्रेट खुलने की खबर आई थी, तब तेल की कीमतों में 9% से ज्यादा की गिरावट आई थी। लेकिन अब अमेरिकी जहाज जब्ती और ईरान के जवाबी कदम ने बाजार को फिर से अस्थिर कर दिया है।
होर्मुज तनाव से दुनिया भर में ईंधन कीमतें बढ़ने का डर
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज दुनिया के सबसे व्यस्त जलमार्गों में से एक है। यहां से रोजाना लाखों बैरल तेल गुजरता है। अगर यहां लंबे समय तक अड़चन बनी रही या हमले हुए, तो वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति प्रभावित होगी। इससे महंगाई बढ़ सकती है और दुनिया भर में पेट्रोल-डीजल की कीमतें प्रभावित हो सकती हैं।

जहाज जब्ती से US-ईरान के रिश्तों में नई दरार
वर्तमान में अमेरिका और ईरान के बीच एक नाजुक युद्धविराम (ceasefire) चल रहा था, जो जल्द ही खत्म होने वाला था। ट्रंप ने बातचीत को लेकर आशावादी रुख दिखाया था, लेकिन ईरानी अधिकारियों ने कहा कि कोई स्पष्ट प्रगति नहीं है। इस जहाज जब्ती की घटना से इस्लामाबाद में होने वाली संभावित शांति वार्ता भी खतरे में पड़ गई है। दोनों पक्षों के बयान विरोधाभासी हैं, जिससे बाजार में अनिश्चितता बढ़ गई है।
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स्थिति अभी भी बहुत तरल (fluid) है। अगर तनाव और बढ़ा तो तेल की कीमतें $100 प्रति बैरल के पार जा सकती हैं। वहीं, अगर डिप्लोमैटिक प्रयास सफल रहे और होर्मुज स्ट्रेट सामान्य हो गया, तो कीमतें फिर गिर सकती हैं। निवेशक और आम लोग दोनों ही इस क्षेत्र से आने वाली खबरों पर नजर रख रहे हैं।
Oil Prices Jump सिर्फ बाजार की प्रतिक्रिया नहीं, बल्कि भू-राजनीतिक तनाव का सीधा परिणाम है। भारत जैसे तेल आयातक देशों के लिए पेट्रोल-डीजल की कीमतें और मुद्रास्फीति एक बड़ी चिंता का विषय बन सकती है। आगे की खबरों पर नजर बनाए रखें।
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