BRICS 2026 में डॉलर पर निर्भरता घटी, 90% भुगतान स्थानीय करेंसी में, BRICS समूह के भीतर आर्थिक सहयोग लगातार नए स्तर पर पहुंच रहा है। रूस ने दावा किया है कि संगठन के सदस्य देशों के साथ उसके लगभग 90 फीसदी भुगतान राष्ट्रीय मुद्राओं में किए जा रहे हैं। यह संकेत देता है कि BRICS देशों के बीच व्यापार और वित्तीय लेनदेन में डॉलर पर निर्भरता तेजी से कम हो रही है।
रूस के राष्ट्रपति प्रवक्ता दिमित्री पेस्कोव ने कहा कि BRICS के साथ रूस का सहयोग लगातार मजबूत हो रहा है। उन्होंने भारत की BRICS अध्यक्षता की भी सराहना की और कहा कि नई दिल्ली की अगुवाई में संगठन के भीतर संवाद और समन्वय को नई दिशा मिली है।
भारत की नेतृत्व भूमिका पर रूस का भरोसा
रूस ने साफ तौर पर संकेत दिया है कि BRICS 2026 में भारत की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण रही है। पेस्कोव के अनुसार, भारत की अध्यक्षता के दौरान संगठन के सदस्य देशों के बीच आपसी सहयोग को बढ़ाने के लिए कई अहम कदम उठाए गए। इससे न केवल राजनीतिक समन्वय मजबूत हुआ, बल्कि आर्थिक साझेदारी को भी नई गति मिली।

BRICS जैसे बहुपक्षीय मंच पर भारत की सक्रियता को वैश्विक स्तर पर एक मजबूत कूटनीतिक संकेत माना जा रहा है। रूस का यह बयान ऐसे समय आया है जब दुनिया के कई देश वैकल्पिक भुगतान प्रणालियों और स्थानीय मुद्राओं में व्यापार को बढ़ावा देने पर विचार कर रहे हैं।
स्थानीय करेंसी में व्यापार क्यों बढ़ रहा है?
BRICS देशों के बीच स्थानीय मुद्राओं में व्यापार बढ़ने के पीछे कई कारण हैं। सबसे बड़ा कारण है अमेरिकी डॉलर पर निर्भरता कम करना और भुगतान प्रणाली को अधिक लचीला बनाना। जब देश अपनी-अपनी करेंसी में लेनदेन करते हैं, तो विदेशी मुद्रा जोखिम घटता है और भुगतान प्रक्रिया भी कई मामलों में आसान हो जाती है।
इसके अलावा, वैश्विक आर्थिक अनिश्चितता, प्रतिबंधों का दबाव और अंतरराष्ट्रीय भुगतान तंत्र में बदलाव की जरूरत ने भी BRICS देशों को नई वित्तीय रणनीतियों की ओर प्रेरित किया है। ऐसे में राष्ट्रीय मुद्राओं में व्यापार को एक व्यावहारिक विकल्प के रूप में देखा जा रहा है।
BRICS 2026 का बढ़ता आर्थिक प्रभाव
BRICS 2026 अब केवल एक राजनीतिक मंच नहीं रह गया है, बल्कि यह वैश्विक अर्थव्यवस्था में एक प्रभावशाली समूह के रूप में उभर रहा है। भारत, रूस, चीन, ब्राजील और दक्षिण अफ्रीका जैसे सदस्य देशों की संयुक्त आर्थिक क्षमता इस संगठन को और मजबूत बनाती है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि BRICS देशों के बीच स्थानीय करेंसी में व्यापार का दायरा और बढ़ता है, तो यह वैश्विक वित्तीय व्यवस्था में बड़े बदलाव का संकेत हो सकता है। इससे क्षेत्रीय व्यापार को बढ़ावा मिलेगा और सदस्य देशों की आर्थिक स्वायत्तता भी मजबूत होगी।

डॉलर के विकल्प की दिशा में बड़ा कदम
रूस का यह बयान BRICS 2026 के भीतर चल रही उस व्यापक सोच को दर्शाता है, जिसमें सदस्य देश अपने आर्थिक हितों को अधिक स्वतंत्र और सुरक्षित तरीके से आगे बढ़ाना चाहते हैं। 90 फीसदी भुगतान का राष्ट्रीय मुद्राओं में होना इस बात का प्रमाण है कि संगठन डॉलर के विकल्प की दिशा में ठोस कदम उठा रहा है।
हालांकि यह प्रक्रिया पूरी तरह से एक समान नहीं है और हर देश की आर्थिक नीतियां अलग हैं, फिर भी स्थानीय करेंसी में व्यापार का बढ़ना BRICS के भविष्य के लिए एक महत्वपूर्ण संकेत माना जा रहा है।
भारत के लिए क्या है महत्व?
भारत के लिए यह विकास रणनीतिक रूप से अहम है। BRICS में उसकी अध्यक्षता के दौरान यदि आर्थिक सहयोग और भुगतान तंत्र को मजबूती मिली है, तो यह भारत की ग्लोबल नेतृत्व क्षमता को भी रेखांकित करता है। साथ ही, स्थानीय करेंसी में व्यापार बढ़ने से भारतीय कारोबारियों और निर्यातकों को भी नए अवसर मिल सकते हैं।
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आने वाले समय में BRICS 2026 देशों के बीच वित्तीय सहयोग, डिजिटल भुगतान और वैकल्पिक व्यापार व्यवस्था पर और अधिक काम होने की संभावना है। ऐसे में भारत की भूमिका इस समूह के भविष्य को आकार देने में निर्णायक साबित हो सकती है।
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