Ajit Doval shares old incident : ‘चीनी सेना ने पकड़ लिए थे हमारे एजेंट’, एनएसए अजीत डोभाल ने सुनाया 50 साल पुराना किस्सा

Ajit Doval shares old incident : राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोवाल ने आईआईटी रुड़की के दीक्षांत समारोह में अपने शुरुआती खुफिया करियर से जुड़ा एक बेहद रोचक और गंभीर किस्सा साझा किया। Ajit Doval shares old incident के रूप में चर्चा में आए इस बयान में उन्होंने बताया कि किस तरह 1970 के दशक में सिक्किम में तैनाती के दौरान उनकी एक खुफिया टीम सीमा के पास भेजी गई थी, लेकिन वह कई दिनों तक वापस नहीं लौटी। बाद में पता चला कि टीम चीन की हिरासत में थी।

डोवाल के अनुसार, यह घटना उस समय की है जब वे सिक्किम क्षेत्र में खुफिया प्रभारी के रूप में काम कर रहे थे। सीमा पार गतिविधियों पर नजर रखने के लिए भेजी गई टीम अचानक लापता हो गई, जिससे स्थिति बेहद संवेदनशील हो गई थी।

चीन की हिरासत में थी टीम, लौटकर भी पूरी तरह टूट चुकी थी

अजीत डोवाल ने बताया कि जब टीम के बारे में जानकारी मिली, तब यह स्पष्ट हुआ कि उन्हें चीन ने पकड़ लिया था। हालांकि बाद में उन्हें छोड़ा गया, लेकिन वे मानसिक और शारीरिक रूप से काफी प्रभावित थे। डोवाल ने कहा कि उस दौर में सीमावर्ती इलाकों में काम करना बेहद चुनौतीपूर्ण था और हर मिशन जोखिम से भरा होता था।

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Ajit Doval shares old incident : ‘चीनी सेना ने पकड़ लिए थे हमारे एजेंट’, एनएसए अजीत डोभाल ने सुनाया 50 साल पुराना किस्सा

उन्होंने यह भी संकेत दिया कि खुफिया कार्य में कई बार ऐसी परिस्थितियां आती हैं, जहां टीम के सदस्यों की सुरक्षा, गोपनीयता और मिशन की सफलता—तीनों एक साथ दांव पर होते हैं।

जांच शुरू हुई तो करियर खत्म होने जैसा लगा

इस घटना के बाद जांच शुरू हुई और अजीत डोवाल को लगा कि उनका करियर खत्म हो सकता है। उन्होंने अपने अनुभव को याद करते हुए कहा कि उस समय हालात बेहद कठिन थे और उन पर जिम्मेदारी का दबाव बहुत ज्यादा था।

लेकिन जांच में उन्हें दोषी नहीं पाया गया। डोवाल ने बताया कि इसका कारण मुख्यालय के नक्शों में मौजूद गलतियां थीं, जिनकी वजह से मिशन की योजना में भ्रम पैदा हुआ।

खुफिया सेवा की चुनौतियों पर डोवाल का संदेश

अपने संबोधन में अजीत डोवाल ने परोक्ष रूप से यह संदेश भी दिया कि राष्ट्रीय सुरक्षा और खुफिया कार्य केवल साहस का नहीं, बल्कि सटीक जानकारी, बेहतर समन्वय और मजबूत तैयारी का भी विषय है। सीमावर्ती इलाकों में एक छोटी सी त्रुटि भी बड़े संकट में बदल सकती है।

उन्होंने अपने अनुभव के जरिए यह दिखाया कि खुफिया सेवा में काम करने वाले अधिकारियों को कितनी अनिश्चितताओं, दबाव और जोखिमों के बीच फैसले लेने पड़ते हैं।

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Ajit Doval shares old incident : सिक्किम में तैनाती के दौर की यादें

सिक्किम भारत के उन संवेदनशील सीमावर्ती क्षेत्रों में शामिल है, जहां सुरक्षा और निगरानी हमेशा अहम रही है। अजीत डोवाल का यह किस्सा उस दौर की जटिलताओं को सामने लाता है, जब सीमाओं पर खुफिया गतिविधियां बेहद सीमित संसाधनों और कठिन भौगोलिक परिस्थितियों में संचालित होती थीं।

डोवाल के बयान ने एक बार फिर यह चर्चा छेड़ दी है कि भारत की सुरक्षा व्यवस्था में खुफिया जानकारी की भूमिका कितनी महत्वपूर्ण होती है। ऐसे मिशनों में सफलता केवल बहादुरी से नहीं, बल्कि सही नक्शों, सटीक इनपुट और बेहतर रणनीति से तय होती है।

क्यों चर्चा में रहा यह बयान

Ajit Doval shares old incident इसलिए भी चर्चा में है क्योंकि उन्होंने एक व्यक्तिगत अनुभव के जरिए खुफिया सेवा की जमीनी सच्चाइयों को सामने रखा। Ajit Doval shares old incident वाला यह किस्सा न केवल उनके करियर की चुनौतीपूर्ण शुरुआत को दिखाता है, बल्कि यह भी बताता है कि राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े काम में छोटी-सी चूक भी कितना बड़ा असर डाल सकती है।

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आईआईटी रुड़की के मंच से साझा किया गया यह अनुभव छात्रों और मौजूद लोगों के लिए भी प्रेरक और विचारोत्तेजक रहा, क्योंकि इसमें जोखिम, जिम्मेदारी और कर्तव्यनिष्ठा का मजबूत संदेश छिपा था।

 

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