Punjab Flood : सितंबर 2025 में, पंजाब (भारत और पाकिस्तान दोनों) में भारी मानसूनी बारिश और प्रमुख नदियों जैसे सतलुज, ब्यास, रावी और चिनाब के उफान के कारण अभूतपूर्व बाढ़ आई है। यह बाढ़ 1988 के बाद की सबसे भीषण आपदा मानी जा रही है।
Punjab Flood की स्थिति
प्रभाव का दायरा
- प्रभावित क्षेत्र: पंजाब के सभी 23 जिले बाढ़ से प्रभावित हैं, जिनमें 1,400 से अधिक गांव डूब गए हैं। लगभग 3.54 लाख लोग प्रभावित हुए हैं, और कम से कम 37 लोगों की मृत्यु हो चुकी है।
- कृषि नुकसान: 1.75 लाख हेक्टेयर कृषि भूमि, विशेष रूप से धान की फसल, जलमग्न हो चुकी है, जिससे किसानों को भारी नुकसान हुआ है।
- प्रमुख नदियाँ और बांध: सतलुज, ब्यास और रावी नदियाँ उच्च बाढ़ स्तर पर हैं। भाखड़ा बांध 84% भरा है (1,680 फीट की खतरे की सीमा के करीब, वर्तमान में 1,678 फीट), पौंग बांध 98% (1,393 फीट पर खतरे की सीमा से अधिक), और रंजीत सागर बांध 92% भरा है।

सबसे प्रभावित जिले
Punjab Flood : गुरदासपुर (1.45 लाख लोग प्रभावित), अमृतसर (1.17 लाख), फिरोजपुर, पठानकोट, फाजिल्का, कपूरथला, तरनतारन, होशियारपुर, रूपनगर, मोगा, संगरूर और SAS नगर (मोहाली) सबसे अधिक प्रभावित हैं। हिमाचल प्रदेश और जम्मू-कश्मीर में भारी बारिश ने स्थिति को और गंभीर बना दिया है।
राहत और बचाव कार्य
- बचाव अभियान: भारतीय सेना, वायु सेना, नौसेना, BSF, NDRF और गैर-सरकारी संगठनों ने 11,330 से अधिक लोगों को बचाया है। 6,582 लोग 122 राहत शिविरों में स्थानांतरित किए गए हैं।
- संसाधन: 35 हेलीकॉप्टर और 100 से अधिक नावें बचाव कार्य में लगी हैं। पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने फिरोजपुर का नाव से दौरा किया और मुआवजे का वादा किया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने केंद्र से हरसंभव सहायता का आश्वासन दिया है।
- वर्तमान स्थिति: 3-4 सितंबर को अतिरिक्त बारिश ने स्थिति को और जटिल कर दिया है। सभी जिलों में हाई अलर्ट है, और चंडीगढ़ में स्कूल 3 सितंबर को बंद रहे।

पाकिस्तानी पंजाब में बाढ़ की स्थिति
प्रभाव का दायरा
- प्रभावित लोग: 38 लाख से अधिक लोग प्रभावित हुए हैं, और 2,300 से अधिक गांवजल से भरा हुआ हैं। पंजाब में कम से कम 220 लोगों की जान जा चुकी है, जो राष्ट्रीय मृत्यु संख्या (884) का हिस्सा है।
- प्रमुख नदियाँ: सतलुज (गंडा सिंह वाला पर असाधारण रूप से उच्च स्तर), रावी (सिधनाई और बल्लोकी पर बहुत उच्च स्तर), और चिनाब (चिनियोट पर बहुत उच्च स्तर) उफान पर हैं।
- कृषि और पशुधन: चावल, कपास और गन्ने की फसलें ख़तम हो गई हैं, जिससे खाद्य सुरक्षा और अर्थव्यवस्था पर खतरा मंडरा रहा है। 4.05 लाख पशुओं को स्थानांतरित किया गया है।
सबसे प्रभावित जिले
Punjab Flood : सियालकोट, नारोवाल, मुजफ्फरगढ़, कसूर, लाहौर, गुजरात और चिनियोट सबसे अधिक प्रभावित हैं। सियालकोट में पिछले 49 वर्षों की तुलना में 24 घंटे में अधिक बारिश दर्ज की गई।
राहत और बचाव कार्य
- बचाव अभियान: लगभग 18 लाख लोग निकाले गए हैं, जिनमें पिछले 48 घंटों में 3 लाख शामिल हैं। 415 राहत शिविर और 466 अतिरिक्त शिविर स्थापित किए गए हैं। सेना ड्रोन और नावों का उपयोग कर रही है।
- स्वास्थ्य आपातकाल: हैजा, हेपेटाइटिस और सांप के काटने के खतरे के कारण स्वास्थ्य आपातकाल घोषित किया गया है। 398 पशु चिकित्सा शिविर कार्यरत हैं।
- वर्तमान स्थिति: राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (NDMA) ने 6 सितंबर तक रावी और चिनाब नालों में उच्च से बहुत उच्च बाढ़ स्तर की चेतावनी दी है। रावल बांध के स्पिलवे 5 सितंबर को खोले गए। Punjab Flood के कारण कई निर्वाचन क्षेत्रों में उप-चुनाव स्थगित कर दिए गए हैं।
सीमा-पार संदर्भ
- जल विवाद : भारत द्वारा थीन (रंजीत सागर), भाखड़ा और पौंग बांधों से पानी छोड़ा जाना बाढ़ का एक प्रमुख कारण रहा है। पाकिस्तान ने भारत पर बिना पर्याप्त चेतावनी के पानी छोड़ने का आरोप लगाया है, जबकि भारत का कहना है कि उसने मानवीय आधार पर चेतावनियाँ दीं। अप्रैल 2025 में एक आतंकी हमले के बाद भारत ने सिंधु जल संधि के तहत नियमित डेटा साझा करना निलंबित कर दिया था।
- जलवायु परिवर्तन : एक्सपर्ट्स का कहना है कि जलवायु परिवर्तन के कारण अनियमित मानसून और पुराने बांध डिज़ाइनों ने बाढ़ को और गंभीर बना दिया है। दोनों देशों को बेहतर बाढ़ प्रबंधन प्रणालियों की आवश्यकता है।
Punjab Flood
सामाजिक प्रतिक्रियाएँ
- X पर भावनाएँ: भारतीय पंजाब में, लोग सरकारी तैयारियों की कमी की आलोचना कर रहे हैं, कुछ इसे 1992 से भी बदतर बता रहे हैं। पाकिस्तानी पंजाब में, अपर्याप्त जल निकासी प्रणालियों और सरकारी प्रतिक्रिया पर गुस्सा है। लोग बेहतर बुनियादी ढांचे जैसे बांधों और नहरों की मांग कर रहे हैं।
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Punjab Flood 2025 ने लाखों लोगों के जीवन को प्रभावित किया है, और स्थिति अभी भी गंभीर बनी हुई है। दोनों देशों में सरकारें और सेना राहत कार्यों में जुटी हैं, लेकिन जलवायु परिवर्तन और बुनियादी ढांचे की कमी जैसे लॉन्ग टर्म मुद्दों को संबोधित करना आवश्यक है। लेटेस्ट अपडेट के लिए भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) या पाकिस्तान के राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (NDMA) जैसे विश्वसनीय स्रोतों की जाँच करें।


