GM S.P. Singh : दिल्ली से सटे हाईटेक शहर नोएडा की पहचान अब सिर्फ ऊंची इमारतों से नहीं, बल्कि यहां की वर्ल्ड क्लास सुविधाओं और साफ-सफाई से भी होने लगी है. इस बदलाव के पीछे नोएडा अथॉरिटी के (जनरल मैनेजर) GM S.P. Singh की बड़ी भूमिका मानी जा रही है. डिप्टी जनरल मैनेजर (DGM) से जनरल मैनेजर के पद पर पहुंचे एस.पी. सिंह ने अपनी ग्राउंड लेवल प्लानिंग से शहर की बुनियादी व्यवस्था को एक नया रूप दिया है.
आइए जानते हैं कि कैसे उनके बड़े फैसलों और काम करने के तरीके ने नोएडा को विकास की नई राह पर ला खड़ा किया है:
जब नोएडा बना देश का साफ शहर
GM S.P. Singh के करियर की सबसे बड़ी उपलब्धियों में नोएडा को देश का सबसे साफ शहर बनाना शामिल है. उनके हेल्थ और जनस्वास्थ्य विंग के कुशल मैनेजमेंट का ही नतीजा था कि 10 लाख की आबादी वाली कैटेगरी में नोएडा को राष्ट्रीय स्वच्छता सर्वेक्षण में टॉप रैंकिंग (पहला स्थान) मिली.
उन्होंने न सिर्फ घर-घर से कूड़ा उठाने की व्यवस्था को दुरुस्त किया, बल्कि कचरे के सही निपटारे (वेस्ट सेग्रिगेशन) को भी पूरी तरह लागू कराया. इसके अलावा, शहर में आवारा पशुओं की समस्या से निपटने के लिए उन्होंने चार प्रमुख सेक्टरों में हाईटेक डॉग शेल्टर्स बनवाए और बड़े पैमाने पर एंटी-रेबीज वैक्सीनेशन ड्राइव चलाई.

₹3 करोड़ का मॉडल रोड और हाईटेक लाइब्रेरी
GM S.P. Singh का काम सिर्फ साफ-सफाई तक सीमित नहीं रहा, बल्कि सिविल और इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स में भी उन्होंने कमाल का विज़न दिखाया है.
सेक्टर 126 की मॉडल रोड : शहर की सड़कों को अंतरराष्ट्रीय स्तर का लुक देने के लिए उन्होंने ₹3 करोड़ की लागत से सेक्टर 126 में एक शानदार ‘मॉडल रूट’ तैयार करवाया. इस सड़क पर दृष्टिबाधित (visually impaired) लोगों के लिए खास टाइल्स, पैदल चलने वालों के लिए ग्रेनाइट पाथवे और बेहतरीन ड्रेनेज सिस्टम बनाया गया है.
सेक्टर 52 की डिजिटल लाइब्रेरी : युवाओं की पढ़ाई को बढ़ावा देने के लिए वे सेक्टर 52 में ₹8.29 करोड़ की लागत से बन रही चार मंजिला डिजिटल लाइब्रेरी के प्रोजेक्ट को लीड कर रहे हैं. कॉर्पोरेट सोशल रिस्पॉन्सिबिलिटी (CSR) के सहयोग से बन रहा यह सेंटर प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले छात्रों के लिए एक बड़ा डिजिटल हब बनने जा रहा है.
कड़क अफसर, लेकिन कर्मचारियों के लिए संवेदनशील दिल
नियमों का पालन कराने में सख्त दिखने वाले एस.पी. सिंह का रुख अपने कर्मचारियों और ग्राउंड स्टाफ के लिए हमेशा से काफी मददगार रहा है. हाल ही में सफाई कर्मचारियों से जुड़े एक मामले में उन्होंने न केवल व्यावहारिक रास्ता निकाला, बल्कि उनके सुरक्षित भविष्य के लिए भी बड़े कदम उठाए:

₹5 लाख का मेडिकल कवर : ग्राउंड पर काम करने वाले फ्रंटलाइन वर्कर्स की सेहत को ध्यान में रखते हुए उन्होंने ₹5 लाख का मेडिकल सपोर्ट पैकेज मंजूर कराया.
सैलरी और पीएफ का पूरा हिसाब : उन्होंने साफ किया कि कर्मचारियों को मिलने वाले करीब ₹21,000 के मासिक वेतन में प्रोविडेंट फंड (PF) और बाकी सभी सामाजिक सुरक्षा लाभ पूरी तरह शामिल हैं. इसके साथ ही उन्होंने यह भी सुनिश्चित किया कि हर नए टेंडर रिन्यूअल के साथ कर्मचारियों की सैलरी में ₹2,000 से ₹3,000 की बढ़ोतरी की व्यवस्था बनी रहे.
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क्या है आगे का प्लान?
नोएडा अथॉरिटी के सीईओ लोकेश एम. के निर्देशों के तहत, GM S.P. Singh उन गिने-चुने अफसरों में गिने जाते हैं जो मुश्किल से मुश्किल डेडलाइन के भीतर काम पूरा करने के लिए जाने जाते हैं. मॉनसून से पहले शहर की ड्रेनेज सफाई का मोर्चा संभालना हो या नए एक्सप्रेस-वे कॉरिडोर से जुड़ी प्लानिंग, उनका हर कदम नोएडा को एक ‘स्मार्ट और सस्टेनेबल सिटी’ बनाने की दिशा में बढ़ रहा है. यही वजह है कि आज उन्हें नोएडा के विकास के सबसे मजबूत स्तंभों में से एक माना जा रहा है.
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