India-Canada
India: हल्के समय में कनाडा में बढ़ती भारत के विरोधी गतिविधियों के अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चिंता बड़ा दी है खासकर हिंदू मंदिरों पर हमले और भारत विरोधी पोस्ट के मामले में Canada government की चुप्पी ने भारत समुदाय में घुसा और सुरक्षा की भावना पैदा की है यह न केवल देशो के रिश्ते में दरार पैदा कर रही है, बल्कि कनाडा में रहने वाले भारतीयों की सुरक्षा पर भी सवाल उठ रहा है।
हिंदू मंदिरों पर हमले और भारत विरोधी पोस्टरबाजी
कनाडा में हाल के महीने में कई हिंदू मंदिरों को निशाना बनाया गया है मंदिरों की दीवारों पर भारत विरोधी पोस्टर लगाए जा रहे हैं जो खाली स्थान समर्थक नारे लिखे जा रहे हैं इन पोस्ट में भारतीय सरकार और खासकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ नफरत फैलाने वाली बातें कहीं जा रही हैं जो पोस्ट में भारतीय अधिकारों की हत्या की धमकियां तक दी गई हैं।

इन घटनाओं ने कनाडा में भारतीय समुदाय को हिला कर रख दिया है या न केवल धार्मिक आस्था का अपमान है बल्कि कनाडा की बहुलता और सांस्कृतिक विविधता के सिद्धांतों के खिलाफ है धार्मिक स्थलों पर हमले और हिंसा का इस्तेमाल आतंक फैलाना यह बताना कि खालिस्तानी समर्थक ताकत कनाडा में अपनी गतिविधियों को बढ़ाने की कोशिश लगातार कर रही है।
Canada सरकार की छुट्टी
इस पूरे मामले में कनाडा सरकार और खासकर प्रधानमंत्री जस्टिन टुडे की छुट्टी काफी चिंता का विषय है जबकि भारत सरकार ने इस घटना पर चिंता जताई है, कनाडा ने इसे अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का मामला कहकर टाल दिया है लेकिन सवाल यह उठता है कि क्या “अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता” के नाम पर धार्मिक स्थलों को निशाना बनाया गया है, और किसी भी देश के खिलाफ हिंसक प्रचार करना जायज है।
टुडे सरकार का यह रुख भारतीय समुदाय के लिए निराशाजनक है जो भारत सरकार के बार-बार कनाडा से खालिस्तान गतिविधियों को रोक लगाने की मांग कर रही है लेकिन अब तक इस दिशा में कोई भी ठोस कदम नहीं उठा रही है कनाडा की छुट्टी को कुछ लोग खालिस्तानी समर्थक समूह को अप्रत्यक्ष रूप से समर्थन देने के लिए देख रहे हैं जो दोनों देशों के संबंधों के लिए नुकसानदायक हो सकता है।
Indians को कनाडा छोड़ने की धमकियां
कनाडा में खालिस्तान समर्थक आतंकवादियों के खुलेआम भारतीयों को कनाडा छोड़ने की धमकियां दी है सोशल मीडिया और पोस्ट के माध्यम से यह प्रचार किया जा रहा है, कि भारतीय कनाडा में सुरक्षित नहीं है, यह स्थिति और भी गंभीर होते जा रही है जब कनाडा सरकार इस पर कोई सख्त कदम उठाने में भी विफल है।
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