Suchika Tariyal ने एशियन गेम्स 2026 में इतिहास रच दिया। उन्होंने महिलाओं की ट्रेडिशनल MMA -60 kg केटेगरी में ब्रॉन्ज मेडल जीतकर भारत को मिश्रित मार्शल आर्ट्स में पहला एशियन गेम्स मेडल दिलाया। 36 साल की उम्र में यह उपलब्धि सिर्फ एक मेडल नहीं, बल्कि सालों की मेहनत, संघर्ष और कई मार्शल आर्ट्स में महारत का नतीजा है।
Suchika Tariyal का प्रारंभिक जीवन और शुरुआत
Suchika Tariyal का जन्म 16 अगस्त 1990 को उत्तर प्रदेश के बुढ़ाना में हुआ और उनका पालन-पोषण हरियाणा के रोहतक में हुआ। रूढ़िवादी परिवार से आने वाली सुचिका को खेल अपनाने में शुरू में विरोध का सामना करना पड़ा। 12 साल की उम्र में एक उत्पीड़न की घटना ने उनका जीवन बदल दिया। उन्होंने आत्मरक्षा के लिए जूडो सीखना शुरू किया।
दिल्ली के जवाहरलाल नेहरू स्टेडियम और बाद में SAI भोपाल में ट्रेनिंग लेकर उन्होंने जूडो में अपनी नींव मजबूत की।
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जूडो में शानदार करियर
Suchika Tariyal आठ बार की राष्ट्रीय जूडो चैंपियन रहीं। उन्होंने 20 से ज्यादा अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में भारत का प्रतिनिधित्व किया। उनके प्रमुख जूडो उपलब्धियां हैं:
- 2019 कॉमनवेल्थ जूडो चैंपियनशिप में स्वर्ण
- 2019 साउथ एशियन गेम्स में स्वर्ण
- 2018 कॉमनवेल्थ चैंपियनशिप में रजत (महिला 57 किग्रा)
- 2022 कॉमनवेल्थ गेम्स में भाग लिया (ब्रॉन्ज मैच हारकर पांचवें स्थान पर)
जूडो ने उन्हें ग्राउंड फाइटिंग और ग्रैपलिंग में मजबूत बनाया, जो बाद में MMA में काम आया।
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कुरश, जियु-जित्सु और MMA की ओर रुख
जूडो के बाद Suchika Tariyal ने कुरश अपनाया और 2023 एशियन गेम्स (हांगझोउ) में भारत का प्रतिनिधित्व किया। 2024 में उन्होंने JJIF जियु-जित्सु वर्ल्ड चैंपियनशिप में एडल्ट्स कॉन्टैक्ट फीमेल -63 किग्रा श्रेणी में स्वर्ण पदक जीता।
MMA में उनका डेब्यू 2017 में हुआ था। उसके बाद उन्होंने करीब सात साल का ब्रेक लिया। 2024 के अंत में BRAVE Combat Federation के साथ मल्टी-फाइट कॉन्ट्रैक्ट साइन करके उन्होंने वापसी की और BRAVE CF 92 (बहरीन) में जीत दर्ज की। 2026 में उन्होंने AMMA एशियन चैंपियनशिप में भी ब्रॉन्ज मेडल जीते।

Asian Games 2026 में ऐतिहासिक प्रदर्शन
एशियन गेम्स 2026 (आइची-नागोया) में MMA पहली बार शामिल हुआ। सुचिका तारियाल ने क्वार्टर फाइनल में मंगोलिया की अल्तान्चिमेग बैगलमा को 2-0 से हराया और कम से कम ब्रॉन्ज सुनिश्चित कर लिया। सेमीफाइनल में सिंगापुर की तेओ हुई हून से हारने के बावजूद वे ब्रॉन्ज मेडल के साथ पोडियम पर पहुंचीं। यह भारत का MMA में पहला एशियन गेम्स मेडल था।
वे खुद कहती हैं कि जूडो ने उन्हें MMA के लिए तैयार किया। ग्राउंड गेम मजबूत होने के कारण उन्हें सिर्फ स्टैंडिंग और स्ट्राइकिंग पर फोकस करना पड़ा।
सुचिका तारियाल की कहानी क्यों खास है?
- कई मार्शल आर्ट्स में सफलता (जूडो, कुरश, जियु-जित्सु, MMA)
- 36 साल की उम्र में नया इतिहास रचने का साहस
- व्यक्तिगत चुनौतियों और प्रशासनिक बाधाओं के बावजूद निरंतरता
- हरियाणा स्पोर्ट्स डिपार्टमेंट में जूडो कोच के रूप में काम करते हुए भी टॉप लेवल पर प्रदर्शन
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Suchika Tariyal की यात्रा दिखाती है कि सही दिशा, मेहनत और लचीलापन किसी भी उम्र में नई ऊंचाइयां छू सकता है। उनका ब्रॉन्ज मेडल सिर्फ व्यक्तिगत जीत नहीं, बल्कि भारतीय महिलाओं और MMA खिलाड़ियों के लिए प्रेरणा है।
