Noida Violence case ने हाल ही में उत्तर प्रदेश की कानून व्यवस्था को चुनौती दी थी। 13 अप्रैल 2026 को नोएडा के फेज-2 क्षेत्र (सेक्टर 60, 62 आदि) में मजदूरों के वेतन और श्रम संबंधी मांगों को लेकर शुरू हुआ प्रदर्शन हिंसक रूप ले लिया। इस दौरान सैकड़ों फैक्टरियों में तोड़फोड़, आगजनी और हिंसा की घटनाएं हुईं। अब इस नोएडा प्रोटेस्ट वायलेंस केस में पुलिस को बड़ी सफलता मिली है। उत्तर प्रदेश स्पेशल टास्क फोर्स (STF) और गौतम बुद्ध नगर पुलिस ने मुख्य आरोपी आदित्य आनंद (उर्फ रस्ती) को तमिलनाडु के तिरुचिरापल्ली रेलवे स्टेशन से गिरफ्तार कर लिया है।
नोएडा प्रोटेस्ट वायलेंस केस क्या था? (Noida Violence Case)
13 अप्रैल को नोएडा के इंडस्ट्रियल एरिया में मजदूरों का प्रदर्शन शुरू हुआ। शुरू में यह शांतिपूर्ण लग रहा था, लेकिन जल्द ही यह हिंसक हो गया। प्रदर्शनकारियों ने लगभग 350 फैक्टरियों और औद्योगिक इकाइयों में तोड़फोड़ की, आग लगाई और संपत्ति को नुकसान पहुंचाया। पुलिस ने फेज-2 थाने में मामला दर्ज किया, जिसमें दंगा, चोट पहुंचाना, आपराधिक षड्यंत्र, धमकी और अन्य गंभीर धाराएं शामिल हैं।
पुलिस के अनुसार, यह कोई सामान्य मजदूर आंदोलन नहीं था बल्कि एक पूर्व नियोजित साजिश थी। नोएडा प्रोटेस्ट वायलेंस केस में आदित्य आनंद को मुख्य षड्यंत्रकारी (मास्टरमाइंड) बताया जा रहा है।
आदित्य आनंद कौन है?
आदित्य आनंद NIT जमशेदपुर से Btech इंजीनियर है। मूल रूप से झारखंड के हजारीबाग का रहने वाला, वह सॉफ्टवेयर इंजीनियर के रूप में काम करता था, लेकिन बाद में श्रमिक संगठनों से जुड़ गया। पुलिस का दावा है कि उसने 2022 में फेसबुक के जरिए मजदूर बिगुल संगठन से संपर्क किया। 2023 में भगत सिंह जन अधिकार यात्रा के दौरान अन्य आरोपियों से मुलाकात हुई। वह दिशा स्टूडेंट ऑर्गनाइजेशन, RWPI और नवजवान भारत सभा जैसी संगठनों से भी जुड़ा हुआ बताया जा रहा है।

उसकी भागीदारी
- 9-10 अप्रैल को कई व्हाट्सएप ग्रुप बनाकर QR कोड के जरिए मजदूरों को जुटाया।
- भड़काऊ और उत्तेजक भाषण दिए।
- नोएडा में प्रदर्शन के दौरान मौजूद था।
- हिंसा को भड़काने और फैलाने की साजिश रची।
पुलिस ने उसके खिलाफ नॉन-बेलेबल वारंट जारी किया था और गिरफ्तारी पर ₹1 लाख का इनाम घोषित किया गया था।
गिरफ्तारी कैसे हुई?
Noida Violence Case की जांच में STF और नोएडा पुलिस की टीम ने दिल्ली-NCR, उत्तर प्रदेश और तमिलनाडु में छापेमारी की। इलेक्ट्रॉनिक सर्विलांस और टेक्निकल इंटेलिजेंस की मदद से आदित्य आनंद को ट्रैक किया गया। 18 अप्रैल 2026 की रात करीब 1:40 बजे तिरुचिरापल्ली रेलवे स्टेशन से उसे गिरफ्तार कर लिया गया। गिरफ्तारी के दौरान वह चेन्नई की ओर भागने की कोशिश कर रहा था।
गिरफ्तारी के कुछ घंटों के अंदर ही उसने पूछताछ में अपनी भूमिका कबूल कर ली। वह अब ट्रांजिट रिमांड पर नोएडा लाया जा रहा है। पुलिस बड़े नेटवर्क, फंडिंग और अन्य सहयोगियों की जांच कर रही है।

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Noida Violence case में अब तक कई आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है। पुलिस का कहना है कि यह सिर्फ शुरुआत है। जांच में बड़े षड्यंत्र और बाहरी तत्वों की भूमिका भी सामने आ सकती है। कुछ रिपोर्ट्स में पाकिस्तान से चलाए गए फेक वीडियो और मिसइनफॉर्मेशन की भी जांच हो रही है।
यह मामला नोएडा जैसे औद्योगिक क्षेत्र में मजदूर मुद्दों की संवेदनशीलता को भी उजागर करता है। कानून व्यवस्था बनाए रखते हुए वैध मांगों का समाधान जरूरी है, लेकिन हिंसा और साजिश बर्दाश्त नहीं की जा सकती।
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