Violence against Hindus in Bangladesh : आज का यह ब्लॉग कोई साधारण लेख नहीं है। यह एक चीख है, वह चीख जो बांग्लादेश के हिंदू समुदाय की आत्मा से निकल रही है। सोचिये की आप एक ऐसा देश जहां आपका जन्म ही अपराध बन जाए। जहां मंदिर जलाए जाते हैं, घर लूटे जाते हैं, और निर्दोषों को भीड़ की भेंट चढ़ा दिया जाता है। अगर आपके अंदर का मानवता का एक कण बचा है, तो यह ब्लॉग आपके दिल को छू लेगा। हम बात करेंगे बांग्लादेश में हिंदुओं की पीड़ा की, जो अब एक मानवता संकट बन चुकी है। आइए, इस अंधेरे को रोशनी दें।
Violence against Hindus in Bangladesh : एक धीमी मौत का सफर
बांग्लादेश में हिंदू आबादी का सफर दर्दनाक रहा है। 1971 में स्वतंत्रता के समय हिंदू जनसंख्या लगभग 22% थी, लेकिन आज यह घटकर 9% से भी नीचे आ चुकी है। दशकों से चली आ रही भेदभाव की यह प्रक्रिया अब तेज हो गई है। शेख हसीना की सरकार के पतन के बाद, अगस्त 2024 से शुरू हुई हिंसा ने सब कुछ बदल दिया। मुहम्मद यूनुस की अंतरिम सरकार के तहत, यह हिंसा अब व्यवस्थित हमलों का रूप ले चुकी है—लिंचिंग, बलात्कार, मंदिरों का विध्वंस, और घरों में आगजनी।
यह कोई संयोग नहीं है। यह एक पैटर्न है: हिंदुओं को “आवामी लीग समर्थक” का लेबल देकर भीड़ को भड़काना। परिणाम? सैकड़ों मौतें, हजारों विस्थापित। एक रिपोर्ट के अनुसार, अगस्त 2024 से अब तक 47 से अधिक मंदिर ध्वस्त हो चुके हैं, 157 से ज्यादा घर जला दिए गए हैं, और महिलाओं पर हमले आम हो गए हैं। यह धार्मिक उन्माद नहीं, बल्कि जातीय सफाया का प्रयास है।

हाल की घटनाएं : दिपु चंद्र दास की हत्या—एक उदाहरण
केवल पांच दिन पहले, 18 दिसंबर 2025 को, सुनामगंज जिले में 25 वर्षीय हिंदू युवक दिपु चंद्र दास की निर्मम हत्या कर दी गई। एक झूठे ब्लास्फेमी आरोप पर—एक फर्जी फेसबुक पोस्ट के बहाने—उसे पुलिस स्टेशन से घसीटकर बाहर निकाला गया। भीड़ ने उसे पीटा, फिर जिंदा जला दिया, और “अल्लाहु अकबर” के नारे लगाए। उसका परिवार आंखों के सामने यह सब देखता रहा, जबकि पुलिस चुपचाप खड़ी रही।
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Violence against Hindus in Bangladesh : यह अकेली घटना नहीं है। दीनाजपुर में निला रानी को जुलाई 2025 में पीटा गया, बिपनी बाला का बलात्कार हुआ। सुनामगंज के एक गांव को नेस्तनाबूद कर दिया गया—घर लूटे, मंदिर अपवित्र, और 1,700 से अधिक परिवार बेघर। एक दुकानदार ने रोते हुए कहा, “वे सोने के लिए नहीं आए, बल्कि हिंदू जन्म के लिए सजा देने।” शिक्षकों को जूतों की माला पहनाई जाती है, तीर्थयात्रियों को धमकाया जाता है। यह सब कुछ अफवाहों पर—एक पोस्ट, एक शब्द पर।
यूके सरकार की जून 2025 की रिपोर्ट ने कहा था कि अल्पसंख्यकों को “खतरा कम” है, लेकिन ये घटनाएं उसकी पोल खोल देती हैं। यह “धर्मरहित उग्रवाद” नहीं, बल्कि लक्षित नरसंहार है।
दुनिया की प्रतिक्रिया : चुप्पी का सन्नाटा
Violence against Hindus in Bangladesh : कुछ आवाजें तो उठी हैं, लेकिन वे बहुत कम हैं:
- अमेरिका और प्रवासी : अमेरिकी सांसद मारिया एलविरा सलाजार और भारतीय-अमेरिकी जेनिफर राजकुमार ने दिपु की हत्या की निंदा की, इसे “लक्षित हिंसा” बताया। अमेरिका और भारत में बांग्लादेशी दूतावासों के बाहर विरोध प्रदर्शन हुए।
- भारत का रुख : नई दिल्ली ने द्विपक्षीय स्तर पर चिंता जताई है, लेकिन आलोचक कहते हैं कि शरणार्थी गलियारे या प्रतिबंध जैसे कदम जरूरी हैं।
- संयुक्त राष्ट्र और एमनेस्टी : खतरे की चेतावनी दी, लेकिन कार्रवाई नहीं। कोई बड़ा प्रतिबंध नहीं, कोई आपात निकासी नहीं।
Violence against Hindus in Bangladesh : बाइडेन, मोदी, या एंटोनियो गुटेरेस जैसे नेता: आप कहां हैं? एक आपातकालीन शिखर सम्मेलन कब? यह राजनीति नहीं, जीवित रहने की लड़ाई है। हिंदू परिवार चीख रहे हैं: “हमें भारत में नागरिकता दो या गोली मार दो—यह नर्क जीना असह्य है।”

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क्या किया जा सकता है? आह्वान और समाधान
Violence against Hindus in Bangladesh : आपकी चीख हथियार है, इसे बुलंद रखें –
- तत्काल सुरक्षा : खतरे में हैं तो बांग्लादेश हिंदू बौद्ध क्रिश्चियन यूनिटी काउंसिल या UNHCR हॉटलाइन (+880-2-5566-1212) से संपर्क करें। भारत के लिए ढाका हाई कमीशन पर आवेदन करें।
- ग्लोबल प्रचार : X पर वीडियो शेयर करें (#SaveBangladeshiHindus ट्रेंडिंग है)। लीडर्स को टैग करें: @narendramodi, @JoeBiden, @antonioguterres।
- याचिका और दान : एमनेस्टी की जांच याचिकाओं पर हस्ताक्षर करें; हिंदू अमेरिकन फाउंडेशन या ओपन डोर्स को सहायता दें।
- नेताओं के लिए : भारत CAA को तेज करे। अमेरिका/ईयू: यूनुस के सहयोगियों पर यात्रा प्रतिबंध। संयुक्त राष्ट्र: तुरंत मॉनिटर तैनात करें।
