नई दिल्ली | विशेष लेख
कभी-कभी जिंदगी के सबसे बड़े एहसास बहुत छोटे-छोटे पलों में छुपे होते हैं। ऐसा ही एक भावुक दृश्य तब सामने आता है जब एक बेटा या बेटी पहली बार घर से दूर जाने के लिए ट्रेन में बैठता है — और पीछे रह जाता है एक पिता, जो अपने जज्बात शब्दों में नहीं कह पाता।
सोशल मीडिया पर इन दिनों एक मार्मिक कविता तेजी से VIRAL हो रही है, जिसे पढ़कर हजारों लोग भावुक हो रहे हैं। इस कविता में एक पिता की चुपचाप छुपी चिंता, प्रेम और बिछड़ने का दर्द बेहद सजीव तरीके से उभरकर सामने आता है।
पढ़िए यह भावुक कविता:
ट्रेन पर बैठ जाने के बाद ,
थोड़ा झुक कर जब मैने अपने बाबा को देखा ,
अब तक जो कठोर ,निर्भीक से दिखते थे,
थोड़ा कोमल थोड़ा डरा हुआ सा देखा,
मेरी खिड़की पर आ सामान कुछ छूटा तो नहीं,
कहने के बहाने मुझे निहारते देखा ,
बार–बार अपना ख्याल रखना कह,
घबराहट में चश्मे को साफ करते देखा,
अपनी पैंट की जेब टटोल रहे थे ,
की याद आया शर्ट की जेब में है,
कुछ नोट कुछ सिक्के निकालते देखा,
मेरे हाथों पर उन सिक्कों और नोटो को दे,
घबराना मत कह ढाढ़स देते देखा,
पहुंच कर फोन करना ,समान को देखना जैसी हिदायत तो दे दी,
मगर ये ना कह सके कैसे रहूंगा तेरे बिना,
ऐसा कभी किसी पिता को नहीं कहते देखा,
चुप अपने हर ग़म को मुस्कुराते छुपाते देखा,
मैने मेरे पिता को…….!!
स्टेशन पर मुझे ,मुझ में ही कहीं खुद को छोड़ ,
पिता को घर जाते देखा….!!
— स्वरचित : विद्या त्रिपाठी
भावनाओं से भरी यह कविता क्यों छू रही है दिल?
यह कविता सिर्फ शब्दों का संग्रह नहीं, बल्कि हर उस इंसान की कहानी है जिसने कभी अपने घर, अपने पिता को पीछे छोड़कर आगे बढ़ने की कोशिश की है।
इसमें पिता का वह रूप दिखता है जो अक्सर दिखाई नहीं देता —
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जो मजबूत दिखता है, पर अंदर से बेहद भावुक होता है
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जो अपने डर और अकेलेपन को छुपाकर सिर्फ हिम्मत देता है
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जो विदा के समय खुद को पीछे छोड़ देता है
सोशल मीडिया पर लोगों की प्रतिक्रिया
इस कविता को पढ़कर कई यूज़र्स ने कमेंट किया कि उन्हें अपने जीवन के वही पल याद आ गए जब उनके पिता उन्हें स्टेशन छोड़ने आए थे।
कई लोगों ने इसे “हर बेटे-बेटी की सच्चाई” और “पिता के प्रेम का सबसे सटीक चित्रण” बताया।
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