Karmayogi Course : आज का समय डिजिटल और तेजी से बदलते भारत का है। जहां विकसित भारत@2047 का सपना देखा जा रहा है, वहां सरकारी मशीनरी को भी पुराने ढर्रे से निकलकर अधिक कुशल, नागरिक-केंद्रित और तकनीक-सक्षम बनाना जरूरी हो गया है। इसी उद्देश्य से भारत सरकार ने मिशन कर्मयोगी शुरू किया, और इसका मुख्य हिस्सा है Karmayogi Course , खासकर उत्तर प्रदेश में यह कोर्स अब अधिकारियों के लिए अनिवार्य हो चुका है। लेकिन आखिर कर्मयोगी कोर्स क्या है और यूपी के अफसरों के लिए यह इतना महत्वपूर्ण क्यों है? आइए विस्तार से समझते हैं।
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कर्मयोगी कोर्स क्या है? (What is Karmayogi Course)
मिशन कर्मयोगी (Mission Karmayogi) प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की एक महत्वाकांक्षी पहल है, जिसे सितंबर 2020 में लॉन्च किया गया। इसका पूरा नाम नेशनल प्रोग्राम फॉर सिविल सर्विसेज कैपेसिटी बिल्डिंग (NPCSCB) है।
इस मिशन का मूल मंत्र है – “कर्मचारी से कर्मयोगी” बनना। यानी सरकारी कर्मचारी सिर्फ नियमों का पालन करने वाला न रहे, बल्कि वह भविष्योन्मुखी, नागरिक-केंद्रित, कुशल और परिणाम-उन्मुख बने।
इसके लिए बनाया गया है iGOT Karmayogi प्लेटफॉर्म – दुनिया का सबसे बड़ा सरकारी ई-लर्निंग पोर्टल। यहां हजारों फ्री ऑनलाइन कोर्स उपलब्ध हैं, जैसे:
- डिजिटल गवर्नेंस और AI
- साइबर सिक्योरिटी
- आपदा प्रबंधन
- नेतृत्व विकास
- नीति निर्माण
- भूमिका-आधारित स्किल्स (Role-based training)
ये कोर्स हिंदी, अंग्रेजी और अन्य भारतीय भाषाओं में उपलब्ध हैं। फोकस सिर्फ किताबी ज्ञान पर नहीं, बल्कि प्रैक्टिकल स्किल्स, केस स्टडीज और वास्तविक चुनौतियों से निपटने पर है।

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उत्तर प्रदेश में कर्मयोगी कोर्स की अनिवार्यता
Karmayogi Course : उत्तर प्रदेश मिशन कर्मयोगी के क्रियान्वयन में देश में सबसे आगे है। 2025 में यूपी ने सबसे ज्यादा यूजर्स ऑनबोर्ड किए और सबसे ज्यादा कोर्स कम्पलीट किए। लेकिन 2026 में यह और सख्त हो गया है।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने जनवरी 2026 में स्पष्ट निर्देश दिए
- सभी अधिकारियों और कर्मचारियों के लिए 7-दिन का कैपेसिटी बिल्डिंग प्रोग्राम अनिवार्य।
- इसे प्रमोशन और ACR (Annual Confidential Report) से सीधे लिंक किया गया। बिना पूरा किए प्रमोशन रुक सकता है या ACR प्रभावित हो सकती है।
- 31 मार्च 2026 तक लेटेस्ट 3 कोर्स (जिसमें AI, साइबर सिक्योरिटी आदि शामिल) पूरा करना जरूरी। रिपोर्ट iGOT पर अपलोड करनी होगी।
- विभागों को निर्देश – जरूरत-आधारित कोर्स बनाकर प्लेटफॉर्म पर अपलोड करें।
खासकर आपदा प्रबंधन कोर्स को बहुत महत्व दिया गया है। फरवरी 2026 में रिलीफ कमिश्नर के आदेश से डीएम, एसपी, एडीएम, सीडीओ, एसडीएम, एएसपी, तहसीलदार आदि जिलास्तरीय अधिकारियों के लिए यह अनिवार्य हो गया। नए पोस्टिंग पर 1 महीने के अंदर पूरा करना जरूरी।
क्यों? क्योंकि यूपी में बाढ़, हीटवेव, वज्रपात जैसी आपदाएं आम हैं। बेहतर तैयारी से जन-धन का नुकसान कम हो सकता है।
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यूपी के अधिकारियों के लिए क्यों इतना जरूरी?
- प्रमोशन और सेवा शर्तें: अब ट्रेनिंग सिर्फ वैकल्पिक नहीं, बल्कि परफॉर्मेंस का हिस्सा है। खराब परफॉर्मेंस पर प्रमोशन रुक सकता है।
- डिजिटल और तकनीकी बदलाव: AI, साइबर सिक्योरिटी जैसे कोर्स अनिवार्य होने से अधिकारी आधुनिक चुनौतियों से निपट सकेंगे।
- नागरिक-केंद्रित शासन: मिशन का फोकस है – सेवाएं तेज, पारदर्शी और संवेदनशील हों।
- जमीनी स्तर पर प्रभाव: ANM, ASHA, पुलिस कांस्टेबल, पंचायती राज स्टाफ तक के लिए प्रैक्टिकल ट्रेनिंग पर जोर। यूपी में लाखों कर्मचारी पहले से जुड़े हैं, और करोड़ों कोर्स पूरे हो चुके हैं।
- राष्ट्रीय लक्ष्य में योगदान: केंद्र में 30 लाख+ और राज्यों में 2.2 करोड़+ कर्मचारियों को कवर करना है। यूपी इसका मॉडल राज्य बन रहा है।
कर्मयोगी बनना अब मजबूरी नहीं, जरूरत है
Karmayogi Course सिर्फ एक ऑनलाइन ट्रेनिंग नहीं है। यह सरकारी व्यवस्था को नए भारत के अनुरूप ढालने का माध्यम है। यूपी में जहां पहले से ही लाखों अधिकारी सक्रिय हैं, वहां अब प्रमोशन और ACR से जुड़ने के कारण हर अधिकारी को गंभीरता से इसे पूरा करना होगा।
अगर आप सरकारी सेवा में हैं या किसी अधिकारी को जानते हैं, तो तुरंत iGOT Karmayogi पर रजिस्टर करें। यह न सिर्फ करियर के लिए फायदेमंद है, बल्कि देश की सेवा को और बेहतर बनाने का एक छोटा लेकिन महत्वपूर्ण कदम है।
विकसित भारत की नींव मजबूत तभी बनेगी, जब हर कर्मचारी कर्मयोगी बनेगा।
