हाल ही में घोषित 2024-25 की थर्ड क्वार्टर एस्टीमेट के GDP अनुमान, 2024-25 के दूसरे सेकंड एडवांस एस्टीमेट, और 2023-24 और 2022-23 के मॉडिफाइड व अंतिम GDP अनुमान कुछ पहले किए गए अनुमानों में बड़े सुधार को दर्शाते हैं। उदाहरण के लिए, 2023-24 की GDP वृद्धि दर के अनुमान को 100 बेसिस प्वाइंट्स की तेज बढ़ोतरी के साथ 8.2% से 9.2% कर दिया गया है, जिससे यह फाइनेंसियल ईयर पिछले दशक में सबसे तेज वृद्धि में से एक बन गया है।
तेजी से बढ़ता सार्वजनिक और घरेलू निवेश
जैसा कि अनुमान था, फाइनेंसियल ईयर 2024 में सार्वजनिक और घरेलू निवेश जीडीपी वृद्धि के प्रमुख घटक बने।
भारत की GDP में संतुलन आ रहा है
अच्छी खबर यह है कि भारत की आर्थिक वृद्धि अधिक संतुलित हो रही है, क्योंकि फाइनेंसियल ईयर 2025 में जीडीपी में प्रिवेट कंज़म्प्शन की हिस्सेदारी बढ़ी है। क्रिसिल की रिपोर्ट के अनुसार, दूसरी एडवांस अनुमान में 10 बेसिस प्वाइंट (bps) की मामूली वृद्धि के साथ GDP वृद्धि दर 6.5% पर पहुंच गई है, जो कोविड के पहले दशक के औसत 6.6% के करीब है।
GDP में पिछले वर्ष की तेज वृद्धि
क्रिसिल के मुख्य अर्थशास्त्री धर्मकीर्ति जोशी ने कहा, “और यह पिछले वर्ष की जीडीपी वृद्धि में 100 bps की तीव्र वृद्धि के बाद है, जो 9.2% थी।” उन्होंने यह भी कहा कि फाइनेंसियल ईयर 2025 में जीडीपी वृद्धि 6.5% रहने की उम्मीद है, जिसे सामान्य मानसून, कम फ़ूड इन्फ्लेशन और इस महीने शुरू हुई दर कटौती (75-100 bps) का समर्थन मिलेगा।

GDP और कॉर्पोरेट निवेश पर प्रभाव
हालांकि, सार्वजनिक और घरेलू निवेश में वृद्धि देखने को मिली, लेकिन कॉर्पोरेट क्षेत्र में जीडीपी योगदान अब भी सीमित है। फाइनेंसियल लचीलापन और कम लोन भार के बावजूद, कंपनियों ने निवेश में अधिक गार्डनेस्स दिखाई है। चल रहे टैरिफ युद्ध और चीन से संभावित डंपिंग का डर जीडीपी में कॉर्पोरेट निवेश को धीमा कर सकता है।
टैरिफ जोखिम और भारत की GDP पर प्रभाव
जोशी ने कहा, “टैरिफ नीतियों से उत्पन्न होने वाले जोखिम विकसित हो रहे हैं और आने वाले महीनों में और अधिक उपायों की संभावना है, जिससे जीडीपी फॉरकास्ट पर नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है।” वित्तीय वर्ष 2024-25 की तीसरी तिमाही (अक्टूबर-दिसंबर) में जीडीपी वृद्धि दर 6.2% तक तेज हो गई, जो दूसरी तिमाही के संशोधित आंकड़े 5.6% से अधिक थी।
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GDP, आर्थिक वृद्धि और राजकोषीय घाटा
अब वित्तीय वर्ष 2024-25 के लिए जीडीपी वृद्धि 6.5% अनुमानित की गई है, जबकि 2023-24 के लिए GDP वृद्धि दर संशोधित होकर 12 वर्षों के उच्चतम स्तर 8.2% पर पहुंच गई है। इस बीच, वर्तमान फाइनेंसियल ईयर(अप्रैल-जनवरी) में भारत का राजकोषीय घाटा 11.70 लाख करोड़ रुपये या वार्षिक अनुमान का 74.5% रहा।

