Putin SPIEF 2026 Speech : सेंट पीटर्सबर्ग, 5 जून 2026 — रूस के सेंट पीटर्सबर्ग में आयोजित SPIEF 2026 (St. Petersburg International Economic Forum) के मुख्य सत्र में राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने महत्वपूर्ण भाषण दिया। Putin SPIEF 2026 Speech में उन्होंने ग्लोबल साउथ के तेज विकास, बहुध्रुवीय विश्व व्यवस्था और पश्चिमी प्रतिबंधों के बावजूद रूस की आर्थिक मजबूती पर जोर दिया।
Putin SPIEF 2026 Speech का मुख्य फोकस
फोरम की थीम “Pragmatic Dialogue: The Path to a Stable Future” पर बोलते हुए पुतिन ने कहा कि आज विश्व की आर्थिक शक्ति का केंद्र पश्चिम से पूर्व और दक्षिण की ओर खिसक रहा है।
- ग्लोबल साउथ का उदय: पुतिन ने जोर देकर कहा कि विकासशील देश (Global South) तेजी से आगे बढ़ रहे हैं। BRICS देशों का वैश्विक GDP में हिस्सा बढ़कर लगभग 40% हो गया है, जबकि G7 का हिस्सा घटकर 30% से नीचे आ गया है। यह बदलाव अपरिवर्तनीय है।
- रूस की आर्थिक लचीलापन: पश्चिमी प्रतिबंधों के बावजूद रूस की अर्थव्यवस्था मजबूत है। रूस का व्यापार अब मुख्य रूप से एशिया, अफ्रीका, लैटिन अमेरिका और ग्लोबल साउथ देशों के साथ हो रहा है, जो कुल व्यापार का करीब 79% है।
- सहयोग और निवेश: उन्होंने पारदर्शी व्यापार, समान अवसर, प्रौद्योगिकी पहुंच और निवेश पर बल दिया। पुतिन ने BRICS, SCO और EAEU जैसे मंचों के जरिए नई साझेदारियों की वकालत की।

प्रमुख अतिथि और मॉडरेशन
मुख्य सत्र में चीन के उपराष्ट्रपति हान झेंग, उज्बेकिस्तान के राष्ट्रपति शवकत मिर्जियोयेव और तंजानिया की राष्ट्रपति सामिया सुलुहू हसन भी शामिल हुए। सत्र का संचालन India Today Group की वरिष्ठ पत्रकार गीता मोहन ने किया।
SPIEF 2026 का महत्व
इस साल SPIEF में 130 से ज्यादा देशों के लगभग 20,000 प्रतिनिधि शामिल हुए। सऊदी अरब गेस्ट कंट्री के रूप में शामिल है। फोरम को रूस का आर्थिक “डावोस” माना जाता है, जहां ग्लोबल आर्थिक सहयोग, AI, डिजिटलीकरण, ऊर्जा सुरक्षा और सस्टेनेबल डेवलपमेंट जैसे मुद्दों पर चर्चा हुई।
Putin SPIEF 2026 Speech में राष्ट्रपति पुतिन ने स्पष्ट किया कि रूस ग्लोबल साउथ के देशों के साथ समानता, पारस्परिक लाभ और संप्रभु विकास पर आधारित साझेदारी चाहता है। उन्होंने डी-डॉलराइजेशन और वैकल्पिक वित्तीय तंत्रों की भी बात की, जो पश्चिमी वर्चस्व से मुक्ति की दिशा में एक कदम माना जा रहा है।
Putin SPIEF 2026 Speech न केवल रूस की विदेश नीति का ऐलान था, बल्कि बदलते विश्व व्यवस्था में ग्लोबल साउथ को मजबूत आवाज देने का प्रयास भी था। विशेषज्ञों का मानना है कि यह फोरम रूस को पश्चिमी अलगाव से उबरने और नई आर्थिक गठबंधनों को मजबूत करने का मंच साबित हो रहा है।
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भारत के लिए क्या मायने रखता है?
भारत और रूस के बीच रणनीतिक साझेदारी को मजबूत करने, BRICS सहयोग बढ़ाने और ऊर्जा-प्रौद्योगिकी क्षेत्र में नए अवसर पैदा करने का यह महत्वपूर्ण मंच है।
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