भारतीय लोकतंत्र के इतिहास में स्वर्णिम अक्षरों में दर्ज हो गया। आज Dr. Menaka Guruswamy ने राज्यसभा में शपथ ग्रहण की और वे भारत की पहली खुलकर अपनी LGBTQ+ पहचान रखने वाली सांसद बन गईं। तृणमूल कांग्रेस (TMC) की ओर से पश्चिम बंगाल से नामित होने के बाद बिना किसी विरोध के चुनी गईं मेनका गुरुस्वामी का यह कदम समावेशिता और विविधता की दिशा में एक बड़ा मील का पत्थर साबित होगा।

Dr. Menaka Guruswamy : शपथ ग्रहण समारोह
आज संसद भवन में राज्यसभा के सभापति सी.पी. राधाकृष्णन ने 19 नए सदस्यों को शपथ दिलाई। इनमें शरद पवार, रामदास अठावले जैसे दिग्गज नेताओं के साथ डॉ. मेनका गुरुस्वामी भी शामिल रहीं। शपथ लेते समय उन्होंने संविधान की मूल प्रति और राष्ट्रध्वज के सम्मान में शपथ ली।
यह क्षण सिर्फ एक व्यक्ति की सफलता नहीं, बल्कि पूरे LGBTQ+ समुदाय के लिए प्रतीकात्मक जीत है। दशकों तक अदालतों, सड़कों और सामाजिक आंदोलनों में संघर्ष करने के बाद समुदाय अब संसद तक अपनी आवाज पहुंचा पाया है।
मेनका गुरुस्वामी कौन हैं? (Who is Dr. Menaka Guruswamy?)
Dr. Menaka Guruswamy सुप्रीम कोर्ट की सीनियर अधिवक्ता (Senior Advocate) हैं और संवैधानिक कानून की प्रमुख विशेषज्ञ मानी जाती हैं। उनकी शैक्षणिक पृष्ठभूमि बेहद समृद्ध है — उन्होंने हार्वर्ड और ऑक्सफोर्ड जैसी प्रतिष्ठित संस्थाओं से शिक्षा प्राप्त की है।
उनकी सबसे बड़ी उपलब्धि धारा 377 के मामले में नजर आती है। 2018 में सुप्रीम कोर्ट के ऐतिहासिक फैसले Navtej Singh Johar vs Union of India में उन्होंने प्रमुख भूमिका निभाई, जिसने समलैंगिकता को अपराध की श्रेणी से बाहर कर दिया। इस फैसले ने लाखों भारतीयों के जीवन को बदल दिया और उन्हें सम्मानजनक अस्तित्व का अधिकार दिया।

मेनका गुरुस्वामी पश्चिम बंगाल सरकार के कई महत्वपूर्ण मामलों में भी राज्य का प्रतिनिधित्व कर चुकी हैं, जिसमें RG Kar मेडिकल कॉलेज मामले जैसी संवेदनशील सुनवाइयाँ शामिल हैं।
इस उपलब्धि का महत्व
- पहली बार : इससे पहले भारतीय संसद (लोकसभा या राज्यसभा) में कोई भी व्यक्ति खुलकर अपनी queer पहचान के साथ सांसद नहीं बना था। राज्य स्तर पर कुछ उदाहरण जरूर रहे हैं, लेकिन राष्ट्रीय स्तर पर यह पहला मौका है।
- समावेशिता का संदेश : उनकी उपस्थिति संसद में एलजीबीटीक्यू+ मुद्दों पर अधिक संवेदनशील चर्चा को बढ़ावा देगी। समानता, गरिमा और भेदभाव-रहित समाज के संवैधानिक मूल्यों पर अब और मजबूती से काम हो सकेगा।
- ममता बनर्जी की पहल : तृणमूल कांग्रेस की प्रमुख और पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने उन्हें नामित कर यह स्पष्ट संदेश दिया कि उनकी पार्टी विविधता और समावेश को महत्व देती है।
शपथ ग्रहण के बाद मेनका गुरुस्वामी ने कहा कि उनका पूरा ध्यान संवैधानिक मूल्यों — समानता, भाईचारा और न्याय — पर केंद्रित रहेगा। संसद में वे कानूनी विशेषज्ञता के साथ-साथ सामाजिक न्याय के मुद्दों को भी मजबूती से उठाएंगी।

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यह उपलब्धि युवा LGBTQ+ व्यक्तियों के लिए प्रेरणा स्रोत बनेगी। यह दिखाती है कि संघर्ष और मेहनत से कोई भी ऊंचाई हासिल की जा सकती है, चाहे समाज कितनी भी चुनौतियां खड़ी करे।
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