Nitish Kumar : बिहार की राजनीति में नीतीश कुमार का नाम एक युग का प्रतीक रहा है। लंबे समय तक राज्य के मुख्यमंत्री के रूप में ‘सुशासन बाबू’ के नाम से मशहूर नीतीश कुमार अब एक नया मोड़ ले रहे हैं। मार्च 2026 में उन्होंने राज्यसभा चुनाव के लिए नामांकन दाखिल कर दिया है, जिसके साथ ही बिहार के मुख्यमंत्री पद से उनका इस्तीफा तय माना जा रहा है। यह फैसला बिहार की सियासत में एक बड़े बदलाव की शुरुआत है, जहां दो दशकों से अधिक समय तक नीतीश कुमार ने सत्ता की कमान संभाली।
नीतीश कुमार का प्रारंभिक जीवन और शिक्षा(Early Life and Education of Nitish Kumar)
नीतीश कुमार का जन्म 1 मार्च 1951 को बिहार के पटना जिले के बख्तियारपुर में हुआ था। उनके पिता राम लखन सिंह एक स्वतंत्रता सेनानी और प्रसिद्ध गांधीवादी नेता थे। नीतीश ने अपनी प्रारंभिक शिक्षा पटना में पूरी की और बिहार कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग (अब एनआईटी पटना) से मैकेनिकल इंजीनियरिंग की डिग्री हासिल की। इंजीनियरिंग की पढ़ाई के बावजूद उनका झुकाव राजनीति की ओर रहा।
1970 के दशक में जयप्रकाश नारायण के ‘संपूर्ण क्रांति’ आंदोलन में उन्होंने सक्रिय भाग लिया। समाजवादी विचारधारा से प्रभावित होकर उन्होंने राजनीतिक जीवन की शुरुआत की। राम मनोहर लोहिया, जयप्रकाश नारायण और वी.पी. सिंह जैसे दिग्गजों की छत्रछाया में उन्होंने राजनीति के विभिन्न पहलुओं को समझा।

राजनीतिक सफर की शुरुआत(Beginning of political journey)
Nitish Kumarने 1980 के दशक में जनता दल से राजनीति में कदम रखा। 1989 में वे पहली बार लोकसभा सदस्य चुने गए। 1990 के दशक में वे केंद्रीय मंत्री बने—रेलवे, कृषि और सड़क परिवहन जैसे महत्वपूर्ण विभाग संभाले। 1996 में वे जनता दल (यूनाइटेड) के गठन में शामिल हुए और पार्टी के प्रमुख चेहरे बने।
2000 में बिहार के मुख्यमंत्री पद पर पहली बार पहुंचे, लेकिन अल्पकालिक रहा। असली बदलाव 2005 में आया, जब एनडीए गठबंधन के साथ उन्होंने बिहार में सरकार बनाई। 2005 से 2014 तक और फिर विभिन्न अंतरालों में उन्होंने कुल 10 बार मुख्यमंत्री पद संभाला—यह बिहार के इतिहास में एक रिकॉर्ड है।
सुशासन और विकास के काम
Nitish Kumar को ‘सुशासन बाबू’ कहा जाता है क्योंकि उन्होंने बिहार में कानून-व्यवस्था सुधारने, सड़कें बनाने, बिजली पहुंचाने, शिक्षा और स्वास्थ्य में सुधार जैसे बड़े कदम उठाए। जाति-आधारित राजनीति से ऊपर उठकर उन्होंने पिछड़े वर्गों, महिलाओं और अल्पसंख्यकों के लिए कई योजनाएं चलाईं। महिला आरक्षण, साइकिल योजना और शराबबंदी जैसे फैसले उनकी पहचान बने।
उनकी राजनीतिक चतुराई भी मशहूर रही—वे कई बार गठबंधन बदलकर सत्ता में बने रहे, जिससे बिहार में स्थिरता आई।
राज्यसभा जाने का फैसला : एक नया अध्याय
मार्च 2026 में नीतीश कुमार ने सोशल मीडिया पर पोस्ट कर घोषणा की कि वे राज्यसभा चुनाव लड़ना चाहते हैं। उन्होंने लिखा कि पिछले दो दशकों से अधिक समय से उनकी इच्छा थी कि वे बिहार विधानमंडल और संसद के दोनों सदनों में प्रतिनिधित्व करें। 5 मार्च को उन्होंने नामांकन दाखिल किया, जहां गृह मंत्री अमित शाह भी मौजूद रहे।
राज्यसभा नियमों के अनुसार, सांसद बनने के लिए मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देना अनिवार्य है। इसलिए अप्रैल 2026 तक (शपथ ग्रहण के समय) वे पद छोड़ देंगे। नई सरकार एनडीए गठबंधन की बनेगी, जिसमें भाजपा का प्रभाव बढ़ेगा। संभावना है कि पहली बार बिहार में भाजपा का मुख्यमंत्री बनेगा। उनके बेटे निशांत कुमार के उप-मुख्यमंत्री बनने की भी चर्चा है।

बिहार की राजनीति पर प्रभाव
Nitish Kumar का यह कदम बिहार में एक युग का अंत माना जा रहा है। विपक्षी नेता तेजस्वी यादव ने इसे ‘धोखा’ बताया है। जेडीयू कार्यकर्ताओं में भी कुछ असंतोष दिखा। लेकिन नीतीश ने कहा है कि वे नई सरकार को पूरा सहयोग और मार्गदर्शन देंगे।
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Nitish Kumar बिहार के विकास और राजनीतिक स्थिरता के प्रतीक रहे हैं। राज्यसभा में जाकर वे राष्ट्रीय स्तर पर बिहार की आवाज मजबूत करेंगे। उनका सफर प्रेरणादायक है—एक इंजीनियर से लेकर 10 बार मुख्यमंत्री और अब राज्यसभा सांसद तक।
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