UGC के Promotion of Equity in Higher Education Institutions Regulations, 2026 अब पूरे देश में तीखी बहस और विरोध का केंद्र बने हुए हैं। 13 जनवरी 2026 को अधिसूचित और 15 जनवरी से प्रभावी इन नियमों का मुख्य लक्ष्य उच्च शिक्षा संस्थानों में जाति-आधारित भेदभाव (खासकर SC, ST, OBC के खिलाफ) को खत्म करना और समानता को बढ़ावा देना है। लेकिन जनरल कैटेगरी के छात्रों और संगठनों के विरोध के कारण ये नियम विवादास्पद हो गए हैं।
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आज (28 जनवरी 2026) तक की ताजा स्थिति क्या है? आइए जानते हैं।
UGC Act नियमों की मुख्य बातें
- Equal Opportunity Centre (EOC) : हर संस्थान में अनिवार्य, भेदभाव रोकने और समानता बढ़ाने के लिए।
- Equity Committee : SC/ST/OBC, महिलाएं, दिव्यांग और अल्पसंख्यकों का प्रतिनिधित्व; संस्थान प्रमुख की अध्यक्षता में।
- अन्य तंत्र : 24×7 हेल्पलाइन, इक्विटी स्क्वाड, इक्विटी एम्बेसडर, शिकायत पर 24 घंटे में कार्रवाई।
- दंड : गैर-अनुपालन पर फंडिंग रोक, डिग्री प्रोग्राम बंद या मान्यता रद्द।
- फोकस : 2012 के पुराने नियमों से ज्यादा सख्त, ओबीसी को स्पष्ट शामिल, फैकल्टी/स्टाफ भी कवर।
UGC नियम सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों और बढ़ते भेदभाव मामलों (2019-2024 में तेज उछाल) के बाद आए हैं।
ताजा अपडेट्स (27-28 जनवरी 2026)
- प्रदर्शन जारी : दिल्ली में UGC मुख्यालय के बाहर, लखनऊ, पटना, राजस्थान, बिहार और यूपी के कई शहरों में छात्र सड़कों पर। #Rollback_UGC और #BoycottBJP जैसे हैशटैग ट्रेंड कर रहे हैं। कुछ जगहों पर भूख हड़ताल और इस्तीफे (जैसे बरेली के सिटी मजिस्ट्रेट)।
- सुप्रीम कोर्ट में याचिकाएं : वकील विनीत जिंदल समेत कई PIL दाखिल। याचिकाकर्ता दावा कर रहे हैं कि नियम “रिवर्स डिस्क्रिमिनेशन” को बढ़ावा देते हैं, जनरल कैटेगरी को सुरक्षा नहीं देते और अनुच्छेद 14 का उल्लंघन करते हैं। CJI ने कुछ याचिकाओं में खामियां दूर करने को कहा है, जल्द सुनवाई संभावित।
- सरकारी और राजनीतिक प्रतिक्रियाएं:
- केंद्र सरकार : शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने आश्वासन दिया कि नियमों का दुरुपयोग नहीं होगा, संवैधानिक ढांचे में लागू होंगे और जनरल कैटेगरी के लिए भी प्रावधान जोड़े जा सकते हैं।
- मायावती (BSP) : नियमों का समर्थन, विरोध को “जातिवादी मानसिकता” बताया, लेकिन व्यापक विचार-विमर्श की सलाह।
- AISA और अन्य : समर्थन, लेकिन कुछ कमियों (जैसे अस्पष्ट परिभाषाएं) पर चिंता।
- सोशल मीडिया : X पर दोनों पक्ष सक्रिय। समर्थक इसे सामाजिक न्याय की जीत बता रहे हैं, विरोधी “डर का माहौल” और “झूठी शिकायतों” का डर जता रहे हैं।
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विवाद के प्रमुख कारण
- Equity Committee में जनरल कैटेगरी का कोई प्रतिनिधित्व नहीं – “संभावित अपराधी” मानने का आरोप।
- झूठी शिकायतों पर दंड का प्रावधान हटाया गया।
- भेदभाव की परिभाषा व्यापक, लेकिन मुख्य फोकस केवल वंचित वर्गों पर – जनरल के लिए सुरक्षा नहीं।
- इक्विटी स्क्वाड को “निगरानी तंत्र” बताकर आलोचना।
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UGC Equity Rules 2026 : सरकार संशोधन पर विचार कर रही है, जैसे जनरल कैटेगरी के लिए शिकायत तंत्र मजबूत करना। नियम अभी लागू हैं, संस्थानों को अनुपालन शुरू करना होगा। सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई निर्णायक साबित हो सकती है।
शिक्षा का असली मकसद सभी छात्रों को बिना भेदभाव और डर के आगे बढ़ने का मौका देना है। ये नियम वंचितों की सुरक्षा के लिए जरूरी हैं, लेकिन सभी पक्षों के साथ संतुलन बनाना भी उतना ही महत्वपूर्ण। क्या ये समानता लाएंगे या नए तनाव पैदा करेंगे? समय बताएगा।
