ED का आरोप : जांच में बाधा और सबूतों को हटाना
ED ने आरोप लगाया है कि छापेमारी शांतिपूर्ण तरीके से चल रही थी, लेकिन ममता बनर्जी के बड़े पुलिस बल के साथ पहुंचने के बाद स्थिति बदल गई। एजेंसी के अनुसार, मुख्यमंत्री ने प्रतीक जैन के घर में घुस के किया और महत्वपूर्ण सबूत जैसे डॉक्यूमेंट, इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस और फाइलें जबरजस्ती ले लीं। इसके बाद वह I-PAC के सॉल्ट लेक कार्यालय भी गईं, जहां से भी उनके सहयोगियों और पुलिस ने दस्तावेज हटाए।

ED ने स्पष्ट किया कि यह छापेमारी 2020 में CBI द्वारा दर्ज कोयला तस्करी मामले से जुड़ी है, जिसमें अनूप मांझी उर्फ लाला के नेतृत्व वाले सिंडिकेट पर ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (ECL) के कोयला को चोरी कर बेचने का आरोप है। जांच में हवाला ऑपरेटरों के जरिए करोड़ों रुपये की रकम I-PAC तक पहुंचने के सबूत मिले हैं। एजेंसी ने जोर दिया कि यह किसी राजनीतिक दल को निशाना बनाने के लिए नहीं, बल्कि सबूतों के आधार पर की गई कार्रवाई है। कोई पार्टी कार्यालय नहीं छुआ गया।
ED ने इस मामले में कोलकाता हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है, जहां मुख्यमंत्री पर जांच में बाधा डालने का आरोप लगाया गया है। सुनवाई शुक्रवार को होने की संभावना है।
ममता बनर्जी का पलटवार : राजनीतिक साजिश और चुनावी दस्तावेज चोरी
दूसरी तरफ, ममता बनर्जी ने ED की कार्रवाई को पूरी तरह राजनीतिक बदला बताया। उन्होंने कहा, “वे हमारी पार्टी की हार्ड डिस्क, उम्मीदवारों की लिस्ट, चुनावी रणनीति और प्लान लेने आए थे। क्या ED और अमित शाह का यही काम है?” मुख्यमंत्री ने आरोप लगाया कि केंद्र की भाजपा सरकार एजेंसियों का दुरुपयोग कर तृणमूल कांग्रेस (TMC) को कमजोर करना चाहती है, खासकर 2026 के विधानसभा चुनाव से पहले।
ममता ने प्रतीक जैन को पार्टी का IT सेल प्रमुख बताया और I-PAC को TMC की ऑफिसियल टीम कहा। वह खुद जैन के घर और कार्यालय पहुंचीं, जहां से हरी फाइलें और अन्य सामग्री लेकर निकलीं। उन्होंने मीडिया से कहा कि यह लोकतंत्र की हत्या है और अगर BJP दफ्तरों पर छापा मारा जाए तो क्या होगा?
तृणमूल कांग्रेस ने भी हाई कोर्ट में याचिका दायर की है, जिसमें ED पर पार्टी के चुनावी दस्तावेज चोरी करने का आरोप लगाया गया है। पार्टी ने शुक्रवार को राज्यव्यापी विरोध प्रदर्शन का ऐलान किया है।

ED raids Mamata Banerjee : राजनीतिक प्रतिक्रियाएं
ED raids Mamata Banerjee : भाजपा ने ममता पर जांच में हस्तक्षेप और सबूत नष्ट करने का आरोप लगाया। विपक्ष के नेता सुवेंदु अधिकारी ने इसे “असंवैधानिक” बताया। वहीं, CPI (AM) ने भी मुख्यमंत्री की कार्रवाई की निंदा की।
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ED raids Mamata Banerjee : यह मामला अब कोर्ट में है। दोनों पक्षों की याचिकाओं पर शुक्रवार को सुनवाई हो सकती है। पश्चिम बंगाल की सियासत में यह विवाद चुनावी माहौल को और गरमा सकता है। एक तरफ कानून की कार्रवाई, दूसरी तरफ राजनीतिक स्वतंत्रता का सवाल – यह टकराव लोकतंत्र के लिए कितना सही है, यह समय बताएगा।

