President Droupadi Murmu का गोवा, कर्नाटक और झारखंड दौरा : सांस्कृतिक उत्सवों और समुद्री साहसिकता का अनोखा संगम

भारत की प्रथम आदिवासी President Droupadi Murmu, हमेशा से ही देश के विविधतापूर्ण संस्कृति और विकास की दिशा में एक प्रेरणास्रोत बनी हुई हैं। उनका आगामी दौरा – जो 27 से 30 दिसंबर तक गोवा, कर्नाटक और झारखंड में आयोजित होगा – न केवल प्रशासनिक महत्व रखता है, बल्कि सांस्कृतिक एकता, एजुकेशनल प्रगति और समुद्री सुरक्षा के क्षेत्रों में एक नई ऊर्जा का संचार करेगा। आज, 26 दिसंबर को, जब हम नए वर्ष की दहलीज पर खड़े हैं, आइए इस दौरे की झलकियां देखें और समझें कि यह क्यों इतना विशेष है।

दौरे का अवलोकन : एक यात्रा जो विविधता को जोड़ती है

President Droupadi Murmu 27 दिसंबर की शाम गोवा के लिए रवाना होंगी, जहां से उनका सफर कर्नाटक और फिर झारखंड की ओर बढ़ेगा। यह दौरा तीन राज्यों को जोड़ते हुए भारत की सांस्कृतिक और भौगोलिक विविधता को प्रदर्शित करता है। गोवा की समुद्री हवा से लेकर कर्नाटक के नौसैनिक ठिकानों और झारखंड के आदिवासी उत्सवों तक – यह यात्रा एक संपूर्ण भारतीय कहानी का प्रतिबिंब है।

President Droupadi Murmu, Goa visit, Karnataka tour

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राष्ट्रपति का यह दौरा विशेष रूप से इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि यह स्वतंत्र भारत के 78वें वर्ष में सांस्कृतिक संरक्षण और आधुनिक विकास के बीच संतुलन स्थापित करता है। आइए, दिन-प्रतिदिन की गतिविधियों पर नजर डालें :-

28 दिसंबर : कर्नाटक में समुद्री साहसिकता का रोमांच

कर्नाटक के करवार हार्बर से राष्ट्रपति एक पनडुब्बी में समुद्री सॉर्टी लेंगी। यह कोई साधारण यात्रा नहीं होगी – यह भारतीय नौसेना की क्षमताओं और तटीय सुरक्षा के प्रति राष्ट्रपति की प्रतिबद्धता का प्रतीक है। करवार, जो पश्चिमी तट पर एक महत्वपूर्ण नौसैनिक अड्डा है, यहां राष्ट्रपति का यह कदम युवाओं को नौसेना में करियर चुनने के लिए प्रेरित करेगा। कल्पना कीजिए: गहरे नीले समुद्र में उतरती राष्ट्रपति, जो स्वयं आदिवासी पृष्ठभूमि से हैं, यह दृश्य देश की एकता और शक्ति का जीवंत चित्रण होगा। यह घटना न केवल रक्षा क्षेत्र को मजबूत करेगी, बल्कि पर्यावरण संरक्षण और समुद्री जैव-विविधता पर भी चर्चा का अवसर प्रदान करेगी।

29 दिसंबर : झारखंड में सांस्कृतिक जड़ों की वापसी

झारखंड के जमशेदपुर में राष्ट्रपति ओल चिकी के शताब्दी समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में शामिल होंगी। ओल चिकी – संथाल आदिवासियों की अपनी लिपि – भारतीय भाषाविज्ञान का एक अनमोल रत्न है। इसका शताब्दी वर्ष आदिवासी संस्कृति के संरक्षण का उत्सव है, और President Droupadi Murmu, जो स्वयं संथाल समुदाय से हैं, इस आयोजन को और अधिक भावपूर्ण बना देंगी। यह समारोह न केवल सांस्कृतिक विरासत को पुनर्जीवित करेगा, बल्कि भाषा-आधारित शिक्षा और डिजिटल संरक्षण पर नए विमर्श को जन्म देगा।

उसी दिन, राष्ट्रपति NIT, जमशेदपुर के 15वें दीक्षांत समारोह को संबोधित करेंगी। यह एक ऐसा मंच होगा जहां वे युवा इंजीनियरों को इनोवेशन, नैतिकता और सामाजिक जिम्मेदारी के मूल्यों से जोड़ेंगी। झारखंड जैसे औद्योगिक राज्य में तकनीकी शिक्षा का यह उत्सव देश के ‘Make in India’ अभियान को गति प्रदान करेगा। राष्ट्रपति का संदेश निश्चित रूप से छात्रों के हृदय में बस जाएगा, जो भविष्य के भारत को आकार देंगे।

President Droupadi Murmu, Goa visit, Karnataka tour

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30 दिसंबर : गुमला में जनसंस्कृतिक उत्सव का समापन

दौरे का समापन झारखंड के गुमला में ‘अंतरराज्यीय जनसंस्कृतिक समागम समारोह – कार्तिक यात्रा’ को संबोधित करने के साथ होगा। कार्तिक यात्रा एक पारंपरिक आदिवासी उत्सव है, जो विभिन्न राज्यों के कलाकारों को एक मंच पर लाता है। President Droupadi Murmu का यहां उपस्थित होना सांस्कृतिक एकीकरण का संदेश देगा – जहां पूर्वोत्तर से दक्षिण भारत तक की परंपराएं एक साथ नृत्य करती नजर आएंगी। यह आयोजन पर्यटन, कला और सामुदायिक सद्भाव को बढ़ावा देगा, तथा आदिवासी समुदायों के सशक्तिकरण पर जोर देगा।

दौरे का गहन महत्व : एकता में शक्ति

यह दौरा केवल औपचारिकताओं तक सीमित नहीं है; यह भारत की आत्मा को छूता है।President Droupadi Murmu का आदिवासी बैकग्राउंड से नौसेना की पनडुब्बी तक का सफर प्रेरणा का स्रोत है। यह दिखाता है कि कैसे एक व्यक्ति की यात्रा पूरे राष्ट्र की प्रगति से जुड़ जाती है। सांस्कृतिक समारोहों के माध्यम से, हम अपनी जड़ों को मजबूत करते हैं, जबकि शैक्षिक और रक्षा गतिविधियां भविष्य को सुरक्षित बनाती हैं।

इस दौरे से हमें यह सीख मिलती है कि विविधता ही हमारी ताकत है। चाहे समुद्र की गहराइयों में उतरना हो या आदिवासी नृत्यों में खो जाना, राष्ट्रपति मुर्मू हमें याद दिलाती हैं कि भारत एक परिवार है – जहां हर कोना एक-दूसरे से जुड़ा हुआ है।

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President Droupadi Murmu का उत्साह के साथ स्वागत

27 दिसंबर से शुरू हो रहा यह दौरा निश्चित रूप से यादगार बनेगा। यदि आप गोवा, कर्नाटक या झारखंड में हैं, तो इन आयोजनों में भाग लेने का अवसर न चूकें। राष्ट्रपति का संदेश हमें नई ऊर्जा देगा, और हम सब मिलकर एक मजबूत भारत का निर्माण करेंगे। जय हिंद!

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