India Russia Free Trade : ग्लोबल भू-राजनीतिक तनावों के बीच भारत और रूस की दोस्ती एक बार फिर से चमकती नजर आई। रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की भारत यात्रा के दौरान आयोजित India-Russia बिजनेस फोरम में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दोनों देशों के बीच फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA) पर चर्चा शुरू होने की घोषणा की। यह कदम न केवल आर्थिक सहयोग को नई ऊंचाइयों पर ले जाएगा, बल्कि दोनों पक्षों के संबंधों को ‘उत्तर तारा’ की तरह अटल बनाने की दिशा में एक मील का पत्थर साबित होगा।
India Russia Free Trade : व्यापार का नया द्वार
बिजनेस फोरम में PM Modi ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि भारत और यूरेशियन इकोनॉमिक यूनियन (IAIU) के साथ India Russia Free Trade पर बातचीत की शुरुआत हो चुकी है। IAIU में रूस के अलावा आर्मेनिया, बेलारूस, कजाकिस्तान और किर्गिस्तान जैसे देश शामिल हैं, जो मिलकर एक विशाल बाजार का निर्माण करते हैं। पुतिन ने भी इस प्रस्ताव का स्वागत किया और कहा कि यह समझौता वर्तमान 64 अरब डॉलर के दोनों तरफ व्यापार को दोगुना करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
क्यों है यह समझौता महत्वपूर्ण? सोचिये आप की – सीमाओं पर लगने वाले टैरिफ और बाधाओं के बिना भारतीय उत्पाद जैसे चाय, मसाले, IT सेवाएं और फार्मास्यूटिकल्स आसानी से रूसी बाजार में प्रवेश कर सकें। दूसरी ओर, रूस से आने वाले कच्चे तेल, गैस, उर्वरक और रक्षा उपकरण भारत के लिए सस्ते और विश्वसनीय स्रोत बन जाएंगे। यह न केवल व्यापार को बढ़ावा देगा, बल्कि आपूर्ति श्रृंखला को मजबूत कर ग्लोबल अनिश्चितताओं से निपटने में मदद करेगा।

2030 तक 100 अरब डॉलर का लक्ष्य : समय से पहले संभव?
पिछले वर्ष India-Russia Business 12% की रफ्तार से बढ़कर रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया। अब दोनों देशों ने 2030 तक इसे 100 अरब डॉलर तक ले जाने का महत्वाकांक्षी लक्ष्य रखा है। पीएम मोदी का मानना है कि मजबूत इरादे और रणनीतिक साझेदारी से यह लक्ष्य निर्धारित समय से पहले हासिल किया जा सकता है।
एक दिलचस्प पहलू यह है कि व्यापार लेन-देन में राष्ट्रीय मुद्राओं का उपयोग 96 प्रतिशत तक पहुंच चुका है। इससे डॉलर पर निर्भरता कम हो रही है, जो वैश्विक मुद्रा युद्धों के दौर में एक स्मार्ट कदम है। बिजनेस फोरम में उद्योगपतियों ने भी इस दिशा में सुझाव दिए, जैसे कि संयुक्त वेंचर और निवेश को बढ़ावा देना।
रक्षा से लेकर हरित ऊर्जा तक
India Russia Free Trade के अलावा, मोदी-पुतिन की चर्चा ने कई अन्य क्षेत्रों को छुआ। सुरक्षा और रक्षा में भारत ने निजी कंपनियों को अधिक खोलने का फैसला लिया है, जिससे रूस के साथ संयुक्त उत्पादन बढ़ेगा। अंतरिक्ष क्षेत्र में भी नई साझेदारियां बनेंगी, जहां भारतीय स्टार्टअप्स रूसी तकनीक से लाभान्वित होंगे।
कृषि, EV (इलेक्ट्रिक वाहन) बनाने और सांस्कृतिक आदान-प्रदान पर भी सहमति बनी। विशेष रूप से, हरित ऊर्जा पर फोकस करते हुए दोनों देश सौर और पवन ऊर्जा प्रोजेक्ट्स में साथ काम करेंगे। यह कदम भारत की ‘नेट जीरो’ महत्वाकांक्षा को मजबूत करेगा, जबकि रूस अपनी ऊर्जा विविधीकरण की योजना को आगे बढ़ाएगा।


