Noida Authority News: नोएडा प्राधिकरण ने कार्य में ढिलाई और सार्वजनिक शिकायतों के निस्तारण में लापरवाही बरतने वाले कर्मचारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की है। CEO ने दो लेखपालों के खिलाफ त्वरित कार्रवाई करते हुए एक को नौकरी से मुक्त कर दिया और दूसरे का वेतन रोकने का आदेश दिया। यह कदम एक कड़े संदेश के रूप में सामने आया है कि प्रशासनिक शिथिलता अब बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
शिकायतें और लापरवाही का आरोप
भूलेख विभाग में कार्यरत लेखपाल श्री शुभम भारद्वाज और श्रीमती सीमा यादव पर आरोप था कि उन्होंने माननीय न्यायालय से आच्छादित प्रकरणों, शासकीय कार्यों, IGRS (Integrated Grievance Redressal System) और RTI (Right to Information) से जुड़ी शिकायतों का समय पर समाधान नहीं किया। इसके अलावा, उनके कार्यक्षेत्र में अधिसूचित क्षेत्र एवं अर्जित भूमि पर अवैध अतिक्रमण को लेकर लगातार शिकायतें प्राप्त हो रही थीं, जिनका सही तरीके से निस्तारण नहीं किया गया।
कड़े नियमों का उल्लंघन
उक्त दोनों कर्मियों ने उत्तर प्रदेश सरकारी आचरण नियमावली 1956 और नोएडा सेवा नियमावली 1981 में निहित सरकारी कर्मचारी के कर्तव्यों का घोर उल्लंघन किया है। उनके द्वारा अपने पदीय दायित्वों की अवहेलना और उच्चाधिकारियों के आदेशों की अवज्ञा की गई, जो कि प्राधिकरण के लिए बेहद गंभीर मसला था।
CEO की कड़ी कार्रवाई
मुख्य कार्यपालक अधिकारी (CEO) ने इस गंभीर लापरवाही को देखते हुए तुरंत कड़ा कदम उठाया। लेखपाल श्री शुभम भारद्वाज को तत्काल प्रभाव से नोएडा प्राधिकरण से बर्खास्त कर दिया गया और उनके खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू कर दी गई। इस मामले को उत्तर प्रदेश शासन के पास प्रेषित कर आवश्यक कार्रवाई के लिए भेजा गया है। वहीं, श्रीमती सीमा यादव का वेतन अग्रिम आदेशों तक रोक दिया गया है।
संदेश – ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति
CEO ने इस कड़ी कार्रवाई के माध्यम से सभी अधिकारियों और कर्मचारियों को स्पष्ट संदेश दिया है कि अब कोई भी लापरवाही, भ्रष्टाचार या अनुशासनहीनता बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने कहा कि किसी भी कर्मचारी द्वारा जनता की शिकायतों, विशेषकर IGRS और RTI मामलों को नजरअंदाज करने पर कड़ी दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी। इसके अलावा, CEO ने स्पष्ट किया कि सरकारी भूमि पर अवैध अतिक्रमण को रोकने में विफल रहने वाले संबंधित बीट या क्षेत्र के जिम्मेदार कर्मियों के खिलाफ जवाबदेही तय की जाएगी। ऐसे कर्मियों को प्राधिकरण से बाहर किया जाएगा।
