Lucknow Famous Food : लखनऊ, नवाबों का शहर, खाने के शौकीनों के लिए किसी स्वर्ग से कम नहीं है, जहां हर निवाला अवधी और मुग़लई विरासत की कहानी कहता है। इस शहर का खानपान मसालों के संतुलन, धीमी आंच पर पकाने की कला और नवाबी तहज़ीब का बेजोड़ संगम है, जो साधारण सामग्रियों को भी बेमिसाल स्वाद में बदल देता है। रसीले कबाबों से लेकर सर्दियों की झागदार मिठाइयों तक, आइए चलते हैं लखनऊ की गलियों में स्वाद की इस अनोखी यात्रा पर।
Top 10 : Lucknow Famous Food
गालौटी कबाब: नवाब की पसंद

कहते हैं कि गालौटी कबाब एक ऐसे नवाब के लिए बनाए गए थे जिनके दांत नहीं थे, लेकिन उन्हें कोमल मांस चाहिए था। यह कबाब 150 से अधिक मसालों और कच्चे पपीते के साथ बनाए जाते हैं, जो इन्हें बेहद नरम बना देते हैं। पराठे या शीर्माल (केसर वाला नान) के साथ परोसे जाने वाले ये कबाब लखनऊ की पाक कला की बेमिसाल मिसाल हैं। इन्हें अमीनाबाद की गलियों में कोयले पर सीकते हुए देखना और सूंघना ही भूख जगा देता है।
लखनवी बिरयानी: Lucknow Famous Food

भारी मसालों वाली बिरयानी को भूल जाइए। लखनवी बिरयानी हल्की होती है, जिसमें लौंग और सौंफ जैसे मसालों की खुशबू लंबे दानों वाले चावल और कोमल मांस के साथ मिलती है। इसमें दम की तकनीक का जादू है, जहां बर्तन को सील कर पकाया जाता है ताकि सारी खुशबू अंदर बनी रहे। बुरानी रायते के साथ परोसी जाने वाली यह बिरयानी एक गर्मजोशी भरा अनुभव देती है। चौक की तंग गलियों में बने छोटे-छोटे होटल इस बिरयानी को बड़े हांडी में पकाते हैं।
निहारी और कुलचा: दिल से सुबह की शुरुआत

सुबह का सबसे बेहतरीन नाश्ता है निहारी – एक मटन स्टू जो रातभर धीमी आंच पर पकाया जाता है जब तक कि वह रेशमी और गाढ़ा न हो जाए। इसे मुलायम कुलचे के साथ परोसा जाता है, जो हर निवाले को सुकून भरा बना देता है। अकबरी गेट के पास छोटे ठेलेदार सुबह-सुबह इसकी बड़ी कटोरियां परोसते हैं – एक अनुभव जिसे लखनवी आत्मा कहते हैं।
बास्केट चाट: चटपटे स्वादों का धमाका

लखनऊ की स्ट्रीट फूड दुनिया बास्केट चाट के बिना अधूरी है। यह कुरकुरी आलू की टोकरी होती है, जिसमें छोले, दही, इमली की चटनी और चाट मसाला डाला जाता है। स्वाद और टेक्सचर का एक अद्भुत मेल – खस्ता, मलाईदार और तीखा – जो हर निवाले में मज़ा देता है। हजरतगंज के बाजारों में चाट वाले कलाकारों की तरह इसे परोसते हैं।
मक्खन मलाई: सर्दियों की मीठी सौगात

जैसे ही सर्दियाँ आती हैं, Lucknow की गलियों में मक्खन मलाई की महक फैल जाती है। यह दूध से बना झागदार मिष्ठान्न है, जिसे केसर और मेवों से सजाया जाता है। इसे मिट्टी के बर्तनों में परोसा जाता है और इसका स्वाद बिल्कुल बादलों जैसा हल्का होता है। चौक में सुबह-सुबह लगने वाली दुकानों से इसे पाया जा सकता है, जो दोपहर से पहले ही बिक जाता है।
कुल्फी फालूदा: मलाईदार यादें

मिठाई पसंद करने वालों के लिए कुल्फी फालूदा एक ज़रूरी अनुभव है। इसमें मलाईदार कुल्फी होती है, जिसमें केसर या पिस्ता होता है, ऊपर से फालूदा (वर्मिसेली), गुलाब शरबत और कभी-कभी रबड़ी डाली जाती है। अमीनाबाद की कुल्फी की दुकानें दशकों पुरानी हैं, और इसका स्वाद हर दिन की तरह मिसाल हैं।
खस्ता कचौड़ी: कुरकुरी पूर्णता

यह तल कर बनाई गई कचौड़ियाँ होती हैं, जिनमें मसालेदार दाल या आलू भरे होते हैं। इन्हें चटनी या आलू की सब्जी के साथ परोसा जाता है। बाहर से खस्ता और अंदर से नरम। मक्कबूल गंज की दुकानों पर सुबह-सुबह इनकी भीड़ लगती है – चाय के साथ इसका स्वाद दोगुना बढ़ जाता है।
काकोरी कबाब: नाजुक और लाजवाब

काकोरी कबाब, गालौटी कबाब के और भी नफीस रूप हैं। इन्हें बारीक मांस, कोमल मसालों और चारकोल ग्रिल पर पकाया जाता है। अकबरी गेट या चावल वाली गली के छोटे ढाबों में इन्हें हरे धनिये की चटनी के साथ परोसा जाता है – कबाब प्रेमियों के लिए यह एक खजाने जैसा है।
शीर्माल: मीठी संगत

कोई भी अवधी भोजन शीर्माल के बिना अधूरा है – एक मीठा, केसर से महकता नान जो तंदूर में पकाया जाता है। इसकी हल्की मिठास तीखे कबाबों और करी के साथ शानदार तालमेल बनाती है। चौक की छोटी बेकरी में ताज़ा शीर्माल रोज़ बनते हैं, जो शाम होते-होते खत्म हो जाते हैं।
ठंडाई: मसालेदार ताज़गी

अंत में, सब कुछ ठंडाई से धो डालिए – एक ठंडा दूध आधारित पेय जिसमें बादाम, सौंफ और कभी-कभी थोड़ा भांग भी होता है। यह पेय स्वादिष्ट भी है और लखनवी मसालों के संग ताज़गी भी देता है। चौक की सौ साल पुरानी दुकानों में इसका असली स्वाद मिलता है।
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