Iran Israel war : 23 जून 2025 को ईरान और इज़राइल के बीच चल रहा संघर्ष एक नए और खतरनाक मोड़ पर पहुंच चुका है। यह युद्ध, जो अब अपनी दूसरी सप्ताह में प्रवेश कर चुका है, न केवल मध्य पूर्व की स्थिरता को प्रभावित कर रहा है, बल्कि ग्लोबल अर्थव्यवस्था और कूटनीति पर भी गहरा असर डाल रहा है। इस ब्लॉग में, हम आज की ताज़ा स्थिति, युद्ध के कारण, और इसके संभावित परिणामों पर चर्चा करेंगे।

Iran Israel war की वर्तमान स्थिति
पिछले कुछ दिनों में, इज़राइल ने ईरान के परमाणु और बैलिस्टिक मिसाइल सुविधाओं पर तीव्र हवाई हमले किए हैं। खबरों के अनुसार, इज़राइली वायु सेना ने इस्फ़हान, नतांज़, और फ़ोर्डो में स्थित परमाणु केंद्रों को निशाना बनाया, जिससे ईरान की यूरेनियम संवर्धन क्षमता को गंभीर नुकसान पहुंचा है। इसके जवाब में, ईरान ने इज़राइल पर मिसाइल और ड्रोन हमले किए, हालांकि इनकी तीव्रता पहले की तुलना में कम रही।
संयुक्त राज्य अमेरिका की भूमिका भी इस युद्ध में उल्लेखनीय रही है। 21 जून को अमेरिकी बी-2 बॉमर्स ने ईरान के तीन प्रमुख परमाणु स्थलों पर हमला किया, जिसे अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने “शानदार सैन्य सफलता” बताया। ईरान ने दावा किया कि इन स्थानों से यूरेनियम भंडार पहले ही हटा लिया गया था, जिससे रेडियोलॉजिकल जोखिम कम हुआ।

युद्ध के कारण
ईरान और इज़राइल के बीच तनाव का इतिहास लंबा है। इज़राइल लंबे समय से ईरान के परमाणु कार्यक्रम को अपने लिए खतरा मानता रहा है। दूसरी ओर, ईरान का कहना है कि उसका परमाणु कार्यक्रम शांतिपूर्ण उद्देश्यों के लिए है, लेकिन वह इज़राइल की क्षेत्रीय आक्रामकता का जवाब देने के लिए तैयार है। हाल के महीनों में, क्षेत्रीय गठबंधनों और साइबर हमलों ने दोनों देशों के बीच तनाव को और बढ़ा दिया।
इस युद्ध की शुरुआत तब हुई जब इज़राइल ने ईरान के एक वरिष्ठ सैन्य अधिकारी की हत्या का दावा किया, जिसके जवाब में ईरान ने इज़राइल पर मिसाइल हमले शुरू किए। इसके बाद दोनों देशों के बीच जवाबी कार्रवाइयों का सिलसिला शुरू हो गया।

ग्लोबल प्रतिक्रियाएँ
कूटनीतिक प्रयास
Iran Israel war : युद्ध को रोकने के लिए कई देशों ने कूटनीतिक प्रयास किए हैं, लेकिन अभी तक कोई ठोस सफलता नहीं मिली है। ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अरागची ने 23 जून को मॉस्को का दौरा किया, जहां उन्होंने रूस के साथ युद्ध की स्थिति पर चर्चा की। यूरोपीय देशों ने भी मध्यस्थता की कोशिश की, लेकिन ईरान के यूरेनियम संवर्धन कार्यक्रम पर सहमति न बन पाने के कारण ये प्रयास विफल रहे।
क्षेत्रीय तनाव
ईरान समर्थित समूहों, जैसे कि यमन के हूती और इराक की कताइब हिज़बुल्लाह, ने अमेरिका और इज़राइल के खिलाफ कार्रवाई की धमकी दी है। हूतियों ने अमेरिकी हमलों को “युद्ध की घोषणा” बताया और इज़राइल पर मिसाइल दागे। इराकी मिलिशिया ने अमेरिकी सैनिकों को देश से निकालने की मांग की है।

आर्थिक प्रभाव
युद्ध के कारण तेल की कीमतों में भारी उछाल आया है, क्योंकि होर्मुज़ जलडमरूमध्य, जो ग्लोबल तेल आपूर्ति का एक महत्वपूर्ण मार्ग है, प्रभावित हो सकता है। इसके अलावा, ईरान में इंटरनेट और बिजली आपूर्ति में भारी व्यवधान देखा गया है, जिसे इज़राइली साइबर हमलों का परिणाम माना जा रहा है।
मानवीय और सैन्य नुकसान
इज़राइल में ईरानी मिसाइल हमलों से अब तक 24 लोगों की मौत हो चुकी है और 685 से अधिक घायल हुए हैं। एक प्रमुख अस्पताल, सोरोका मेडिकल सेंटर, 19 जून को हुए हमले में बुरी तरह क्षतिग्रस्त हुआ। दूसरी ओर, ईरान में इज़राइली हमलों से 224 से अधिक लोग मारे गए हैं, जिनमें अधिकांश नागरिक हैं। ईरान के एक वरिष्ठ खुफिया अधिकारी और दो जनरल भी इन हमलों में मारे गए।
भविष्य की संभावनाएँ
यह युद्ध क्षेत्रीय और वैश्विक स्थिरता के लिए एक बड़ा खतरा है। यदि यह और तेज़ हुआ, तो इसमें अन्य देश भी शामिल हो सकते हैं, जिसके परिणामस्वरूप एक व्यापक युद्ध की स्थिति बन सकती है। दूसरी ओर, यदि कूटनीतिक प्रयास सफल हुए, तो दोनों देशों के बीच तनाव को कम किया जा सकता है। हालांकि, वर्तमान में दोनों पक्षों की सख्त नीतियाँ इसे मुश्किल बनाती हैं।

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Iran Israel war : ईरान और इज़राइल के बीच यह युद्ध केवल दो देशों का मसला नहीं है। इसके परिणाम पूरी दुनिया को प्रभावित कर सकते हैं। तेल की कीमतों से लेकर ग्लोबल कूटनीति तक, हर क्षेत्र में इसका असर दिख रहा है। हमें उम्मीद है कि जल्द ही इस युद्ध का शांतिपूर्ण समाधान निकलेगा, ताकि मानवीय संकट को कम किया जा सके।
