Govardhan Pooja 2025 : दीपावली के उजाले के ठीक बाद, कार्तिक शुक्ल प्रतिपदा को मनाया जाने वाला गोवर्धन पूजा का त्योहार हिंदू संस्कृति में एक अनूठा महत्व रखता है। यह पर्व भगवान कृष्ण की उस दिव्य लीला का स्मरण कराता है, जब उन्होंने गोवर्धन पर्वत को अपनी कनिष्ठिका उंगली पर उठाकर वृंदावनवासियों को इंद्र के प्रकोप से बचाया था। आज, 21 अक्टूबर 2025 को दीपावली की रौनक के बाद, कल यानी 22 अक्टूबर 2025 को गोवर्धन पूजा मनाया जाएगा। यह त्योहार न केवल भक्ति का प्रतीक है, बल्कि पर्यावरण संरक्षण और प्रकृति के प्रति कृतज्ञता का भी संदेश देता है।
गोवर्धन पूजा का पौराणिक कथा
भगवत पुराण में वर्णित इस लीला का संबंध द्वापर युग से है। वृंदावन के गोकुलवासी परंपरागत रूप से वर्षा ऋतु में वर्षा देवता इंद्र की पूजा करते थे, ताकि अच्छी फसल और हरी-भरी घास मिले। लेकिन बालकृष्ण ने ग्वाल-बालों को समझाया कि असली उपकार तो गोवर्धन पर्वत का है, जो पशुओं को चारा प्रदान करता है। सबने इंद्र की बजाय गोवर्धन की पूजा की। क्रोधित होकर इंद्र ने सात दिनों तक मूसलाधार वर्षा की। तब कृष्ण ने गोवर्धन पर्वत को उंगली पर उठा लिया और सभी को उसके नीचे आश्रय दिया। अंततः इंद्र शर्मसार हो गया और वर्षा रुक गई। यह कथा हमें सिखाती है कि अहंकार के आगे भक्ति और प्रकृति का सम्मान सर्वोपरि है।

Govardhan Pooja 2025 का महत्व
गोवर्धन पूजा पर्यावरण जागरूकता का प्रतीक है। आज के दौर में, जब जलवायु परिवर्तन एक बड़ी चुनौती है, यह पर्व हमें याद दिलाता है कि प्रकृति के प्रति कृतज्ञ रहना कितना आवश्यक है। यह गुजरात में बेस्टु वर्षा (नव वर्ष) के रूप में भी मनाया जाता है। इसके अलावा, यह अन्नकूट के माध्यम से समृद्धि और दान का संदेश देता है। महाराष्ट्र में इसे बलिप्रतिपद कहा जाता है, जो विष्णु के वामन अवतार की कथा से जुड़ा है। कुल मिलाकर, यह त्योहार कृष्ण की गोपाल लीला को जीवंत करता है और जीवन में संतुलन लाता है।
2025 में गोवर्धन पूजा की शुभ मुहूर्त
दिल्ली के अनुसार, गोवर्धन पूजा 22 अक्टूबर 2025, बुधवार को मनाई जाएगी।
| मुहूर्त | प्रारंभ समय | समापन समय | समय |
| प्रताहकाल | 06:26 AM | 08:42 AM | 2 घंटे 16 मिनट |
| सायंकाल | 03:29 PM | 05:44 PM | 2 घंटे 15 मिनट |
ये समय स्थान के अनुसार थोड़े अलग हो सकते हैं, इसलिए स्थानीय पंचांग की जाँच करें।
गोवर्धन पूजा की विधि और उत्सव
Govardhan Pooja 2025 सरल लेकिन भावपूर्ण होती है। मुख्य रीति-रिवाज इस प्रकार हैं:
- गिरिराज पूजा : गोबर से गोवर्धन पर्वत का प्रतिरूप बनाएं। उसे फूल, चंदन, दीपक और मिष्टान्न से सजाएं। सात परिक्रमा करें और मंत्र जपें: “गिरिराज धाराओ, इंद्र मोर नाश करो।”
- अन्नकूट : 56 या 108 शाकाहारी व्यंजनों का ‘पर्वत’ बनाएं। मौसमी सब्जियाँ, अनाज और दूध उत्पादों से बने ये व्यंजन कृष्ण को अर्पित करें। फिर प्रसाद वितरण करें, जो समृद्धि का प्रतीक है।
- गौ पूजा : गायों को स्नान कराकर तिलक लगाएं, गुड़-हरी चारा खिलाएं। कृष्ण के गोपाल रूप का स्मरण करें।
- द्यूत क्रिडा : कौड़ों से प्रतीकात्मक जुआ खेलें, जो समृद्धि लाता है।
- भजन-कीर्तन : शाम को रासलीला, भजन और सामूहिक भोज। मथुरा-वृंदावन में लाखों श्रद्धालु इकट्ठे होते हैं।
रीज़नल डिवर्सिटी : गुजरात में उंधियू और मठरी प्रसिद्ध हैं, जबकि अन्य जगहों पर हलवा-पूरी का आनंद लें।
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समापन : एक संदेश
Govardhan Pooja 2025 हमें सिखाता है कि सच्ची भक्ति प्रकृति और समुदाय में निहित है। 2025 में इस पर्व को मनाते हुए, आइए हम पर्यावरण की रक्षा का संकल्प लें। आपके घर में सुख-समृद्धि आए, यही कामना है। यदि आपको यह ब्लॉग पसंद आया, तो कमेंट में अपनी गोवर्धन पूजा की यादें साझा करें। जय श्रीकृष्ण!

