Durga Puja 2026 उत्तर प्रदेश और पूरे उत्तर भारत में शारदीय नवरात्रि के साथ मनाई जाएगी। इस साल त्योहार अक्टूबर के दूसरे और तीसरे सप्ताह में पड़ेगा। उत्तर प्रदेश में दुर्गा पूजा मुख्य रूप से नवरात्रि के नौ दिनों और विजयादशमी (दशहरा) के रूप में मनाई जाती है। माँ दुर्गा की आराधना, कलश स्थापना, अष्टमी-नवमी की विशेष पूजा और रावण दहन इस उत्सव की मुख्य विशेषताएँ हैं।
Durga Puja 2026 उत्तर प्रदेश की मुख्य तारीखें
उत्तर भारत (दिल्ली-एनसीआर, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश आदि) के पंचांग के अनुसार:
- महालया: 10 अक्टूबर 2026 (शनिवार)
- शारदीय नवरात्रि शुरू (घटस्थापना): 11 अक्टूबर 2026 (रविवार)
- महा अष्टमी: 19 अक्टूबर 2026 (सोमवार)
- महा नवमी: 19 अक्टूबर 2026 (सोमवार)
- विजयादशमी / दशहरा: 20 अक्टूबर 2026 (मंगलवार)

नोट: बंगाल में विजयादशमी 21 अक्टूबर को मनाई जाती है, लेकिन उत्तर प्रदेश में दशहरा और दुर्गा विसर्जन का मुख्य दिन 20 अक्टूबर है। बैंक, स्कूल और सरकारी दफ्तरों में 20 अक्टूबर को छुट्टी रहती है।
शारदीय नवरात्रि 2026 का दिन-प्रतिदिन कैलेंडर
| दिन | तारीख | देवी स्वरूप | रंग |
| पहला | 11 अक्टूबर | माँ शैलपुत्री | नारंगी |
| दूसरा | 12 अक्टूबर | माँ ब्रह्मचारिणी | सफेद |
| तीसरा | 13 अक्टूबर | माँ चंद्रघंटा | लाल |
| चौथा | 14 अक्टूबर | माँ कूष्मांडा | रॉयल ब्लू |
| पाँचवाँ | 15 अक्टूबर | माँ स्कंदमाता | पीला |
| छठा | 16 अक्टूबर | माँ कात्यायनी | हरा |
| सातवाँ | 17 अक्टूबर | माँ कालरात्रि | ग्रे |
| आठवाँ | 18 अक्टूबर | माँ महागौरी | बैंगनी |
| नौवाँ | 19 अक्टूबर | माँ सिद्धिदात्री | मोर पंख हरा |
19 अक्टूबर को अष्टमी और नवमी दोनों पड़ रही हैं, इसलिए यह दिन बहुत महत्वपूर्ण माना जाता है।
दुर्गा पूजा 2026 का महत्व उत्तर प्रदेश में
Durga Puja 2026 : उत्तर प्रदेश में दुर्गा पूजा शारदीय नवरात्रि के रूप में मनाई जाती है। यह त्योहार माँ दुर्गा की नौ शक्तियों (नवदुर्गा) की आराधना का पर्व है। साथ ही रामलीला और रावण दहन के जरिए भगवान राम की जीत का भी उत्सव मनाया जाता है।

लखनऊ, वाराणसी, कानपुर, प्रयागराज, आगरा और नोएडा जैसे शहरों में बड़े-बड़े पंडाल लगते हैं। घरों में कलश स्थापना, कुमारी पूजा, हवन और भोग का विशेष महत्व है। दशहरे के दिन रावण, कुम्भकरण और मेघनाद के पुतले जलाए जाते हैं, जो बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक है।
प्रमुख अनुष्ठान और पूजा विधि
- घटस्थापना (11 अक्टूबर)
सुबह शुभ मुहूर्त में कलश स्थापना करें। मिट्टी का घड़ा, जौ, पानी, सुपारी, सिक्का और आम के पत्ते रखें। माँ शैलपुत्री की पूजा करें।
2. महा अष्टमी और संधि पूजा (19 अक्टूबर)
यह सबसे पावन दिन है। कुमारी कन्याओं को भोजन कराना, पुष्पाञ्जलि और संधि पूजा अवश्य करें। कई जगहों पर हवन भी होता है।
