Diwali 2026 के लिए लक्ष्मी पूजा का मुहूर्त शाम 5:54 बजे से 7:50 बजे तक बताया जा रहा है।
मुंबई, कोलकाता, बेंगलुरु आदि शहरों में सूर्यास्त के समय के हिसाब से थोड़ा फर्क पड़ सकता है। पूजा प्रदोष काल में अमावस्या तिथि के दौरान करने का विधान है।
Diwali 2026 का महत्व
दिवाली सिर्फ दीये जलाने और मिठाई खाने का त्योहार नहीं है। यह अयोध्या में भगवान राम के 14 साल के वनवास के बाद लौटने की खुशी का प्रतीक है। साथ ही यह बुराई पर अच्छाई की जीत, अंधकार पर प्रकाश और अज्ञान पर ज्ञान की जीत का संदेश देता है। लक्ष्मी-गणेश की पूजा से घर में सुख-समृद्धि और बाधाओं का नाश माना जाता है।
पांच दिनों का सरल विवरण
धनतेरस (6 नवंबर)
इस दिन सोना, चांदी या बर्तन खरीदने का विशेष महत्व है। शाम को यमदीप भी जलाया जाता है।
छोटी दिवाली (7 नवंबर)
घर की सफाई और सजावट का काम पूरा कर लें। कुछ जगहों पर काली पूजा या हनुमान पूजा भी होती है।

मुख्य दिवाली (8 नवंबर)
घर को दीयों और रंगोली से सजाएं। शाम को गणेश-लक्ष्मी की पूजा करें, मिठाई बांटें और परिवार के साथ समय बिताएं। पटाखों का इस्तेमाल कम और सुरक्षित रखें।
गोवर्धन पूजा (10 नवंबर)
भगवान कृष्ण द्वारा गोवर्धन पर्वत उठाने की याद में अन्नकूट चढ़ाया जाता है।
भाई दूज (11 नवंबर)
बहनें भाई को तिलक लगाती हैं और उनके लंबे जीवन की कामना करती हैं।
दिवाली मनाने के कुछ आसान और अच्छे तरीके
- घर की अच्छी सफाई और सजावट पहले से शुरू कर दें।
- पर्यावरण का ध्यान रखते हुए कम पटाखे और ज्यादा दीये इस्तेमाल करें।
- पारंपरिक मिठाइयां घर पर बनाएं या अच्छे जगह से खरीदें।
- परिवार और पड़ोसियों के साथ मिठाई और शुभकामनाएं बांटें।
- अगर संभव हो तो जरूरतमंदों को भी कुछ बांटें।
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